ठेका गायन: चौताला एमसीक्यू क्विज़ | कक्षा 10
यह क्विज़ कक्षा X के ‘हिंदुस्तानी संगीत मुखर (कोड 034)’ विषय की ‘प्रैक्टिकल’ इकाई के अंतर्गत ‘ठेका गायन: चौताला एमसीक्यू क्विज़ | कक्षा 10’ पर केंद्रित है। इसमें दुगुन के साथ हस्त-ताल जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। क्विज़ सबमिट करें और अपने उत्तरों का पीडीएफ डाउनलोड करें!
शैक्षिक सामग्री: चौताला ताल और दुगुन
यह खंड आपको चौताला ताल, इसकी संरचना, और दुगुन व हस्त-ताल के महत्व को समझने में मदद करेगा, जो हिंदुस्तानी संगीत मुखर के लिए महत्वपूर्ण हैं।
चौताला ताल का परिचय
चौताला हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में एक प्रमुख ताल है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से ध्रुपद गायन शैली में किया जाता है। इसे ‘चर ताल’ भी कहा जाता है। यह एक गंभीर और गरिमामय ताल है, जो ध्रुपद की धीमी और विस्तृत प्रकृति के साथ पूर्ण सामंजस्य बिठाती है।
चौताला की मुख्य विशेषताएँ
- मात्राएँ: चौताला में कुल 12 मात्राएँ होती हैं।
- विभाग: इसे 6 विभागों में बांटा गया है, प्रत्येक विभाग में 2-2 मात्राएँ होती हैं।
- तालियाँ: इसमें 4 तालियाँ होती हैं, जो 1, 5, 9 और 11वीं मात्रा पर आती हैं।
- खाली: इसमें 2 खाली होती हैं, जो 3 और 7वीं मात्रा पर आती हैं।
- बोल (ठेका): धा धा दिन ता | किट धा दिन ता | किट ता दिन ता | किट धा दिन धा
चौताला की संरचना (सारणी)
नीचे दी गई सारणी चौताला ताल की मात्राओं, बोलों और ताल-चिन्हों को दर्शाती है:
| विभाग | मात्राएँ | बोल | चिन्ह |
|---|---|---|---|
| 1 | 1, 2 | धा धा | X (सम) |
| 2 | 3, 4 | दिन ता | 0 (खाली) |
| 3 | 5, 6 | किट धा | 2 (दूसरी ताली) |
| 4 | 7, 8 | दिन ता | 0 (खाली) |
| 5 | 9, 10 | किट ता | 3 (तीसरी ताली) |
| 6 | 11, 12 | दिन धा | 4 (चौथी ताली) |
दुगुन (Dugun)
दुगुन का अर्थ है लय को दोगुना करना। जब हम किसी ताल के एक आवर्तन को मूल लय (एकगुन) से दोगुनी गति में प्रस्तुत करते हैं, तो उसे दुगुन कहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि एकगुन में एक मात्रा पर एक बोल बोला जाता है, तो दुगुन में उसी एक मात्रा पर दो बोल बोले जाएँगे। यह ताल की जटिलता और सौंदर्य को बढ़ाने में मदद करता है।
- एकगुन: प्रति मात्रा एक बोल (धा | धा | दिन | ता | किट | धा | दिन | ता | किट | ता | दिन | धा)
- दुगुन: प्रति मात्रा दो बोल (धाधा | दिनता | किटधा | दिनता | किटता | दिनधा)
हस्त-ताल (Handbeats)
हस्त-ताल किसी ताल की मात्राओं, तालियों और खाली को हाथों से प्रदर्शित करने की एक विधि है। यह संगीतकार को लयबद्ध पैटर्न को समझने और बनाए रखने में मदद करती है।
- ताली: जब ताली आती है (जैसे चौताला में 1, 5, 9, 11वीं मात्रा पर), तब हथेली से ताली बजाई जाती है। सम (पहली ताली) के लिए विशेष रूप से ताली बजाई जाती है।
- खाली: जब खाली आती है (जैसे चौताला में 3, 7वीं मात्रा पर), तब हथेली को नीचे की ओर करके बाएँ हाथ से इशारा किया जाता है। इससे ताल का विराम या हल्कापन प्रदर्शित होता है।
त्वरित पुनरीक्षण
- चौताला: 12 मात्रा, 6 विभाग।
- तालियाँ: 1, 5, 9, 11। खाली: 3, 7।
- मुख्यतः ध्रुपद में प्रयुक्त।
- दुगुन: मूल लय का दोगुना।
- हस्त-ताल: ताली के लिए ताली बजाना, खाली के लिए बाएँ हाथ से इशारा।
अभ्यास प्रश्न
1. चौताला ताल किस प्रकार की ताल है?
- सम-ताल
- विषम-ताल
- चक्रधार ताल
- खंडित-ताल
2. ध्रुपद गायन में चौताला के अतिरिक्त प्रयोग होने वाली एक और ताल का नाम बताएँ।
- तीव्रताल
- केहरवा
- दादरा
- झपताल
3. चौताला ताल में सम (पहली मात्रा) पर कौन सा बोल आता है?
- दिन
- किट
- ता
- धा
4. चौताला के 6 विभागों में से कितने विभाग तालियों वाले होते हैं?
- दो
- तीन
- चार
- पाँच
5. एकगुन की तुलना में तिगुन में लय कितनी गुना होती है?
- दो गुना
- तीन गुना
- आधा गुना
- चौगुना