Instrument Structure & Tuning: Sitar MCQs Quiz | Class 10

यह कक्षा X के ‘हिंदुस्तानी संगीत मधुर वाद्ययंत्र (कोड 035)’ विषय की इकाई 2 से संबंधित एक महत्वपूर्ण क्विज है। यह क्विज ‘सितार की बनावट और ट्यूनिंग’ पर केंद्रित है, जिसमें सितार की मूल संरचना और उसकी ट्यूनिंग के अवलोकन जैसे विषय शामिल हैं। अपनी समझ का परीक्षण करने के लिए सभी 10 प्रश्नों के उत्तर दें, फिर ‘सबमिट क्विज’ बटन पर क्लिक करें। आप अपने परिणाम की समीक्षा कर सकते हैं और बाद में संदर्भ के लिए ‘आंसर पीडीएफ डाउनलोड करें’ बटन पर क्लिक करके एक विस्तृत पीडीएफ भी प्राप्त कर सकते हैं।

सितार: बनावट और ट्यूनिंग

सितार भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक प्रतिष्ठित और लोकप्रिय तार वाला वाद्ययंत्र है। इसकी मधुर ध्वनि और जटिल वादन शैली इसे दुनियाभर में पहचान दिलाती है। यह इकाई सितार की मूल संरचना और उसकी पारंपरिक ट्यूनिंग के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डालती है, जो इसके अनूठे ध्वनि विज्ञान को समझने के लिए आवश्यक हैं।

सितार की मूल संरचना (Basic Structure of Sitar)

एक सितार कई प्रमुख भागों से मिलकर बना होता है, जिनमें से प्रत्येक इसकी ध्वनि और कार्यप्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है:

  • तुमबा (Tumba): यह सितार का मुख्य गुंजयमान कक्ष है, जो सूखे कद्दू (bottle gourd) या कभी-कभी सागौन की लकड़ी से बना होता है। यह ध्वनि को प्रवर्धित करता है।
  • दांडी (Dandi): यह सितार का लंबा, खोखला गर्दन वाला भाग है, जिस पर परदे (frets) कसे होते हैं और जिस पर तार बिछे होते हैं। यह आमतौर पर सागौन या शीशम की लकड़ी से बना होता है।
  • तबली (Tabli): यह तुमबा के ऊपर की लकड़ी की सपाट प्लेट होती है, जिस पर घोड़ी (bridge) टिकी होती है। यह ध्वनि कंपन को तुमबा तक पहुंचाती है।
  • घोड़ी (Ghodi): यह तबली के ऊपर स्थित एक छोटा पुल होता है, जिसके ऊपर से वादन के तार और तरफ के तार गुजरते हैं। ज्वारी का महत्वपूर्ण कार्य यहीं होता है।
  • परदे (Pardey/Frets): ये धातु के घुमावदार बार होते हैं, जो दांडी पर मोम और सूती धागे से बांधे जाते हैं। इनकी संख्या आमतौर पर 18 से 20 होती है और इन्हें वादक अपनी आवश्यकतानुसार समायोजित कर सकता है।
  • तार (Strings): सितार में आमतौर पर 7 मुख्य वादन के तार और 11 से 13 तरफ के तार (sympathetic strings) होते हैं।
    • मुख्य वादन के तार: ये आमतौर पर 7 होते हैं, जिनमें 4 मुख्य तार (वादन के लिए) और 3 चिकारी तार (लय और ताल के लिए) शामिल होते हैं।
    • तरफ के तार: ये दांडी के नीचे से गुजरते हैं और जब मुख्य तार बजाए जाते हैं तो ये अपने आप झंकृत होकर ध्वनि में गहराई और अनुनाद जोड़ते हैं।
  • खूँटियाँ (Khuntiyan/Tuning Pegs): ये दांडी के ऊपरी और बगल के हिस्से में लगी होती हैं और इनका उपयोग तारों को कसने या ढीला करके उन्हें ट्यून करने के लिए किया जाता है।
  • मोगरा (Mogra): यह दांडी के नीचे का लकड़ी का हिस्सा होता है, जो तुमबा से जुड़ता है।
  • ज्वारी (Jawari): यह घोड़ी का वह हिस्सा है जहाँ से तार गुजरते हैं। ज्वारी की सटीक बनावट सितार की विशिष्ट “झंकार” या “ज्वार” ध्वनि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह ध्वनि की गुणवत्ता और sustain को नियंत्रित करती है।

सितार की ट्यूनिंग का अवलोकन (Tuning Overview of Sitar)

सितार की ट्यूनिंग एक जटिल प्रक्रिया है जो वादक, राग और वादन शैली के अनुसार भिन्न हो सकती है। हालांकि, एक सामान्य या मानक ट्यूनिंग पैटर्न मौजूद है:

  • मुख्य तारें: सितार की पहली (मुख्य) तार को आमतौर पर मध्य सप्तक के ‘मंद्र पंचम’ (Pa) पर ट्यून किया जाता है। अन्य मुख्य तारों को राग की आवश्यकता के अनुसार ‘मध्य षड्ज’ (Sa), ‘मध्य पंचम’ (Pa), ‘मंद्र षड्ज’ (Sa) आदि पर ट्यून किया जाता है। उदाहरण के लिए, सबसे आम ट्यूनिंग में, मुख्य वादन के तार अक्सर मंद्र पंचम, मध्य षड्ज, और कभी-कभी मंद्र षड्ज पर होते हैं।
  • चिकारी तारें: ये ताल और लय के लिए उपयोग की जाती हैं और आमतौर पर मध्य सप्तक के ‘षड्ज’ (Sa) और ‘तार सप्तक’ के ‘षड्ज’ (Sa) पर ट्यून की जाती हैं।
  • तरफ के तार: इन अनुकंपी तारों को राग के मुख्य स्वरों के अनुसार ट्यून किया जाता है ताकि वे मुख्य तारों के साथ गूंजें और ध्वनि में एक समृद्ध प्रतिध्वनि पैदा करें। ये आमतौर पर मंद्र, मध्य और तार सप्तक के महत्वपूर्ण स्वरों पर ट्यून किए जाते हैं।

ट्यूनिंग में सटीकता सितार से निकलने वाली ध्वनि की शुद्धता और सौंदर्य के लिए महत्वपूर्ण है। वादक ‘खूँटियों’ और छोटे ‘मनकों’ (beads) का उपयोग करके तारों के तनाव को समायोजित करते हैं।

त्वरित पुनरावलोकन (Quick Revision)

  • सितार एक कॉर्डोफ़ोन वाद्य है।
  • तुमबा, दांडी, तबली, घोड़ी, परदे, तार और खूँटियाँ इसके मुख्य भाग हैं।
  • ज्वारी सितार की विशेष झंकार ध्वनि के लिए महत्वपूर्ण है।
  • मुख्य तारें और चिकारी तारें वादन के लिए होती हैं, जबकि तरफ के तार अनुनाद बढ़ाते हैं।
  • सितार की ट्यूनिंग राग और वादन शैली पर निर्भर करती है, लेकिन मंद्र पंचम और मध्य षड्ज सामान्य आधार स्वर हैं।

अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न (5 Extra Practice Questions)

  1. सितार के किस भाग को “ज्वार” देने वाला हिस्सा कहा जाता है?
  2. ‘चिकारी’ तारें सितार में किस उद्देश्य के लिए उपयोग की जाती हैं?
  3. सितार में परदों को दांडी पर किससे बांधा जाता है?
  4. सितार के ‘तुमबा’ का आकार आमतौर पर किस प्राकृतिक वस्तु जैसा होता है?
  5. सितार की ध्वनि में अनुनाद और गहराई जोड़ने वाले तारों को क्या कहा जाता है?