Experiential learning (अनुभवात्मक) MCQs Quiz | Class 9

यह सीबीएसई कक्षा IX-X के ‘द्वितीय भाषा के रूप में हिंदी (कोड 085)’ विषय के ‘दर्शन/दृष्टिकोण’ इकाई पर आधारित अनुभवात्मक अधिगम (Experiential learning) पर एक बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी है। इसमें शिक्षार्थी-केंद्रित वातावरण, स्व-मूल्यांकन, आलोचनात्मक सोच, निर्णय-निर्माण, ज्ञान का निर्माण व पारंगतता, शिक्षक की भूमिका (सुविधा-प्रदाता/प्रेक्षक), सहयोगात्मक व स्वतंत्र सीखना, और सिद्धांत-व्यवहार अंतर कम करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। अपनी समझ का परीक्षण करने के लिए सभी 10 प्रश्नों को हल करें और अपनी तैयारी के स्तर की जांच के लिए सबमिट करें। आप बाद में विस्तृत उत्तर कुंजी के साथ एक पीडीएफ भी डाउनलोड कर सकते हैं।

अनुभवात्मक अधिगम (Experiential Learning): एक विस्तृत समझ

अनुभवात्मक अधिगम एक गतिशील प्रक्रिया है जहाँ शिक्षार्थी सीधे अनुभवों, प्रतिबिंबों, अवधारणाओं और सक्रिय प्रयोग के माध्यम से ज्ञान और कौशल प्राप्त करते हैं। यह केवल सुनने या पढ़ने से अलग है; इसमें छात्र स्वयं करके सीखते हैं, अपनी गलतियों से सीखते हैं, और वास्तविक दुनिया की समस्याओं का समाधान करते हैं। यह अधिगम प्रक्रिया छात्रों को सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुप्रयोगों से जोड़ने में मदद करती है, जिससे उनकी समझ गहरी और स्थायी बनती है।

मुख्य सिद्धांत और लाभ:

1. शिक्षार्थी-केंद्रित वातावरण:

अनुभवात्मक अधिगम में छात्र सीखने की प्रक्रिया के केंद्र में होते हैं। उनकी रुचियों, आवश्यकताओं और सीखने की शैलियों को प्राथमिकता दी जाती है। शिक्षक एक मार्गदर्शक और सहायक की भूमिका निभाता है, जिससे छात्र अपनी गति से अन्वेषण और खोज कर सकें। यह छात्रों में स्वायत्तता और सीखने के प्रति स्वामित्व की भावना विकसित करता है।

2. स्व-मूल्यांकन, आलोचनात्मक सोच और निर्णय-निर्माण:

  • स्व-मूल्यांकन: छात्र अपने प्रदर्शन का स्वयं मूल्यांकन करना सीखते हैं। वे अपनी ताकत और कमजोरियों को पहचानते हैं, जिससे उन्हें अपनी सीखने की रणनीतियों में सुधार करने में मदद मिलती है। यह उन्हें आजीवन सीखने वाला बनाता है।
  • आलोचनात्मक सोच: अनुभवों के माध्यम से छात्र समस्याओं का विश्लेषण करना, विभिन्न दृष्टिकोणों पर विचार करना और तार्किक निष्कर्ष निकालना सीखते हैं। वे केवल जानकारी को स्वीकार नहीं करते, बल्कि उस पर प्रश्न उठाते हैं और उसका मूल्यांकन करते हैं।
  • निर्णय-निर्माण: वास्तविक परिस्थितियों में कार्य करने से छात्रों को विभिन्न विकल्पों का मूल्यांकन करने, उनके संभावित परिणामों पर विचार करने और प्रभावी निर्णय लेने का अभ्यास मिलता है। यह कौशल उन्हें भविष्य में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करता है।

3. ज्ञान का निर्माण व पारंगतता:

अनुभवात्मक अधिगम में ज्ञान “दिया” नहीं जाता, बल्कि “निर्मित” किया जाता है। छात्र सक्रिय रूप से जानकारी को संसाधित करते हैं, नए अनुभवों को पूर्व ज्ञान से जोड़ते हैं, और अपनी समझ को गहराई देते हैं। इस प्रक्रिया से वे विषय वस्तु में केवल जानकारी रखने के बजाय पारंगतता प्राप्त करते हैं, यानी वे ज्ञान को विभिन्न संदर्भों में लागू करने में सक्षम होते हैं।

4. शिक्षक की भूमिका: सुविधा-प्रदाता/प्रेक्षक:

पारंपरिक कक्षाओं के विपरीत, अनुभवात्मक अधिगम में शिक्षक ज्ञान का एकमात्र स्रोत नहीं होता। वे एक सुविधा-प्रदाता, मार्गदर्शक और प्रेक्षक के रूप में कार्य करते हैं। वे छात्रों के लिए सीखने के अवसर बनाते हैं, उन्हें चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित करते हैं, और जरूरत पड़ने पर सहायता प्रदान करते हैं। वे छात्रों को सही उत्तर देने के बजाय सही प्रश्न पूछने में मदद करते हैं।

5. सहयोगात्मक व स्वतंत्र सीखना:

  • सहयोगात्मक सीखना: छात्र समूहों में काम करते हुए एक-दूसरे के अनुभवों और दृष्टिकोणों से सीखते हैं। वे विचारों का आदान-प्रदान करते हैं, समस्याओं का सामूहिक रूप से समाधान करते हैं, और टीमवर्क कौशल विकसित करते हैं।
  • स्वतंत्र सीखना: छात्रों को अपनी सीखने की गति और शैली के अनुसार काम करने की स्वतंत्रता मिलती है। वे अपनी परियोजनाओं का चयन कर सकते हैं, अपनी अनुसंधान विधियों का निर्धारण कर सकते हैं, और अपनी खोजों के लिए जिम्मेदारी ले सकते हैं। इससे उनमें पहल, आत्मनिर्भरता और समस्या-समाधान की क्षमता विकसित होती है।

6. सिद्धांत-व्यवहार अंतर कम करना:

अनुभवात्मक अधिगम का एक महत्वपूर्ण लाभ यह है कि यह सैद्धांतिक ज्ञान और वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोग के बीच के अंतर को पाटता है। छात्र जो अवधारणाएँ किताबों में पढ़ते हैं, उन्हें वास्तविक जीवन की स्थितियों में लागू करते हैं, जिससे वे समझते हैं कि सिद्धांत कैसे काम करते हैं और उनका क्या महत्व है।

परंपरागत बनाम अनुभवात्मक अधिगम

विशेषता परंपरागत अधिगम अनुभवात्मक अधिगम
भूमिका शिक्षक-केंद्रित शिक्षार्थी-केंद्रित
ज्ञान शिक्षक द्वारा दिया गया छात्र द्वारा निर्मित
गतिविधि सुनना, पढ़ना, याद करना करना, अनुभव करना, चिंतन करना, प्रयोग करना
मूल्यांकन मुख्य रूप से परीक्षाओं पर आधारित स्व-मूल्यांकन, पोर्टफोलियो, प्रदर्शन पर आधारित
कौशल विकास मुख्य रूप से शैक्षणिक कौशल आलोचनात्मक सोच, समस्या-समाधान, निर्णय-निर्माण, टीमवर्क

त्वरित पुनरावलोकन:

  • अनुभवात्मक अधिगम का अर्थ है ‘करके सीखना’।
  • छात्र सीखने के केंद्र में होते हैं।
  • स्व-मूल्यांकन छात्रों को अपनी प्रगति समझने में मदद करता है।
  • आलोचनात्मक सोच और निर्णय-निर्माण कौशल विकसित होते हैं।
  • ज्ञान का निर्माण अनुभवों से होता है।
  • शिक्षक एक मार्गदर्शक होता है, ज्ञान देने वाला नहीं।
  • सहयोग और स्वतंत्रता दोनों महत्वपूर्ण हैं।
  • यह सिद्धांत को व्यवहार से जोड़ता है।

अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न:

  1. डेविड कोल्ब द्वारा प्रतिपादित अनुभवात्मक अधिगम चक्र के चार चरण कौन से हैं?
    1. अनुभव, अवलोकन, अवधारणा, प्रयोग
    2. योजना, क्रियान्वयन, विश्लेषण, मूल्यांकन
    3. सुनना, बोलना, पढ़ना, लिखना
    4. सीखना, सिखाना, परीक्षण, पास करना
  2. अनुभवात्मक अधिगम में ‘चिंतनशील अवलोकन’ का क्या महत्व है?
    1. यह केवल दूसरों के अनुभवों को देखने से संबंधित है।
    2. यह अपने अनुभवों पर विचार करने और उनसे सीखने की प्रक्रिया है।
    3. यह भविष्य की योजना बनाने के लिए अनावश्यक है।
    4. यह केवल शिक्षक द्वारा दिया गया फीडबैक है।
  3. अनुभवात्मक अधिगम को बढ़ावा देने वाली एक गतिविधि का उदाहरण क्या हो सकता है?
    1. पाठ्यपुस्तक के अध्यायों को याद करना
    2. एक विज्ञान परियोजना का निर्माण करना
    3. शिक्षक के व्याख्यान सुनना
    4. केवल गृहकार्य पूरा करना
  4. अनुभवात्मक अधिगम में असफलता को कैसे देखा जाता है?
    1. सीखने की प्रक्रिया में एक बाधा के रूप में
    2. सीखने के लिए एक मूल्यवान अवसर के रूप में
    3. केवल एक नकारात्मक परिणाम के रूप में
    4. शिक्षक की असफलता के रूप में
  5. किस प्रकार का वातावरण अनुभवात्मक अधिगम के लिए सबसे उपयुक्त है?
    1. कठोर और नियंत्रित वातावरण
    2. लचीला, सहायक और अन्वेषण-उन्मुख वातावरण
    3. प्रतिस्पर्धी और दबाव भरा वातावरण
    4. जहाँ छात्र चुपचाप बैठे रहते हैं