Chakradar Tukra/Paran in Ektala/Chautala MCQs Quiz | Class 10

यह प्रश्नोत्तरी कक्षा X के उन छात्रों के लिए तैयार की गई है जो हिन्दुस्तानी संगीत (ताल वाद्य) (कोड 036) का अध्ययन कर रहे हैं। यह ‘परीक्षा फोकस’ इकाई पर केंद्रित है, विशेष रूप से ‘चक्रधार टुकड़ा/परण एकताल/चौताल में’ बहुविकल्पीय प्रश्नों को कवर करती है। इस मूल्यांकन का उद्देश्य आपके ‘ज्ञान घटक’ का परीक्षण करना है। सभी 10 बहुविकल्पीय प्रश्नों का प्रयास करें, फिर अपना स्कोर देखने और विस्तृत उत्तर PDF डाउनलोड करने के लिए सबमिट करें।

शैक्षणिक सामग्री: चक्रधार टुकड़ा/परण, एकताल और चौताल का विस्तृत अध्ययन

यह खंड हिन्दुस्तानी संगीत (ताल वाद्य) के छात्रों को चक्रधार टुकड़ा, परण, एकताल और चौताल की गहरी समझ प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो उनकी परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण है।

चक्रधार टुकड़ा

चक्रधार टुकड़ा एक प्रकार की बंदिश है जिसे तबला या पखावज पर बजाया जाता है। यह एक निश्चित ताल चक्र में तीन बार बजाया जाता है, और प्रत्येक बार बजाने पर यह सम (ताल की पहली मात्रा) पर समाप्त होता है। इसकी संरचना में एक ‘तिया’ (तीन बार दोहराया जाने वाला अंश) शामिल होता है, जिसके कारण यह अत्यंत प्रभावशाली और जटिल लगता है। चक्रधार टुकड़ों को अक्सर ताल के मध्य या अंत में प्रदर्शन को अधिक आकर्षक बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है। इनके बोल आमतौर पर ‘धा’ या ‘ताक धिन’ से शुरू होते हैं और ‘धा किट तक’ जैसे बोलों पर समाप्त होते हैं।

परण

परण पखावज की एक पारंपरिक और शुद्ध रचना है। इसमें पखावज के विशिष्ट बोल जैसे ‘धेट धेट’, ‘गदिगन’, ‘थुन थुन’, ‘ताक धिन’ आदि का प्रयोग होता है। परण को अक्सर द्रुत गति में बजाया जाता है और इसमें जटिल लयकारी और छंद का प्रदर्शन होता है। यह पखावज वादन की शक्ति और सूक्ष्मता को प्रदर्शित करता है। यद्यपि यह मुख्य रूप से पखावज की रचना है, तबला वादक भी अपनी वादन शैली में परणों को अनुकूलित करके बजाते हैं। परण भी कभी-कभी चक्रधार प्रकृति के होते हैं, जहाँ वे एक निश्चित बोलचक्र को तीन बार बजाकर सम पर समाप्त होते हैं।

एकताल

एकताल हिन्दुस्तानी संगीत का एक प्रमुख ताल है, जिसमें 12 मात्राएँ होती हैं। यह छह विभागों में विभाजित होता है, जहाँ प्रत्येक विभाग में 2 मात्राएँ होती हैं।

  • मात्राएँ: 12
  • विभाग: 6 (2-2-2-2-2-2 मात्राओं के)
  • तालियाँ: 4 (1, 5, 9, 11वीं मात्रा पर)
  • खाली: 2 (3, 7वीं मात्रा पर)

इसका ठेका ‘धिन धिन धागे तिरकिट तू ना कत ता धागे तिरकिट धिन ना’ है। एकताल का उपयोग अक्सर विलंबित और मध्य लय की गायन और वादन शैलियों में किया जाता है।

चौताल

चौताल भी हिन्दुस्तानी संगीत का एक महत्वपूर्ण ताल है, जिसमें 12 मात्राएँ होती हैं। इसे चार तालियों के कारण ‘चौताल’ कहा जाता है। यह छह विभागों में विभाजित होता है, जहाँ प्रत्येक विभाग में 2 मात्राएँ होती हैं।

  • मात्राएँ: 12
  • विभाग: 6 (2-2-2-2-2-2 मात्राओं के)
  • तालियाँ: 4 (1, 5, 9, 11वीं मात्रा पर)
  • खाली: 2 (3, 7वीं मात्रा पर)

इसका ठेका ‘धा धा दिन ता किट धा दिन ता किट तिट कत गदि गन’ है। चौताल का उपयोग मुख्य रूप से ध्रुपद गायन और पखावज वादन में होता है। इसकी गरिमापूर्ण और गंभीर प्रकृति इसे इन शैलियों के लिए आदर्श बनाती है।

तालियों और खाली का महत्व

किसी भी ताल में तालियाँ और खाली उस ताल की संरचना और लयबद्धता को समझने में मदद करते हैं। तालियाँ ताल के प्रमुख ध्रुवों को चिह्नित करती हैं, जबकि खाली ताल में एक प्रकार का विराम या राहत प्रदान करती है, जो ताल की गतिशीलता को बनाए रखती है।

क्विक रिवीजन नोट्स

  • **चक्रधार टुकड़ा:** एक रचना जिसे तीन बार बजाकर सम पर समाप्त किया जाता है, जिसमें तिया होता है।
  • **परण:** पखावज की विशिष्ट बोलों वाली द्रुत गति की रचना, जो शक्ति और जटिलता दर्शाती है।
  • **एकताल:** 12 मात्रा, 6 विभाग (2-2), 4 तालियाँ (1, 5, 9, 11), 2 खाली (3, 7)।
  • **चौताल:** 12 मात्रा, 6 विभाग (2-2), 4 तालियाँ (1, 5, 9, 11), 2 खाली (3, 7)। (नोट: एकताल और चौताल में तालियाँ और खाली की संख्या और स्थान समान होते हैं, लेकिन बोल और वादन शैली भिन्न होती है)।

अभ्यास प्रश्न

1. पखावज के बोलों का एक उदाहरण क्या है?

  • क) रे गा मा
  • ख) धेट धेट
  • ग) धा धिन धिन धा
  • घ) सा रे गा मा पा

सही उत्तर: ख) धेट धेट

2. चक्रधार टुकड़ा का अंतिम भाग कितनी बार बजाया जाता है?

  • क) एक बार
  • ख) दो बार
  • ग) तीन बार
  • घ) चार बार

सही उत्तर: ग) तीन बार

3. एकताल और चौताल में मात्राओं की संख्या समान क्यों है?

  • क) दोनों में बोल एक जैसे होते हैं।
  • ख) दोनों का उपयोग केवल तबला वादन में होता है।
  • ग) यह संयोग है, वे भिन्न ताल हैं।
  • घ) दोनों ही 12 मात्राओं वाले ताल हैं, पर उनकी प्रकृति और बोल भिन्न होते हैं।

सही उत्तर: घ) दोनों ही 12 मात्राओं वाले ताल हैं, पर उनकी प्रकृति और बोल भिन्न होते हैं।

4. चौताल का उपयोग मुख्य रूप से किस गायन शैली में होता है?

  • क) ख्याल
  • ख) ठुमरी
  • ग) ध्रुपद
  • घ) गजल

सही उत्तर: ग) ध्रुपद

5. ताल की खाली मात्रा क्या दर्शाती है?

  • क) ताल का सबसे तीव्र हिस्सा
  • ख) ताल में एक प्रकार का ठहराव या विराम
  • ग) ताल की अंतिम मात्रा
  • घ) ताल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा

सही उत्तर: ख) ताल में एक प्रकार का ठहराव या विराम

Author

  • CBSE Quiz Editorial Team

    Content created and reviewed by the CBSE Quiz Editorial Team based on the latest NCERT textbooks and CBSE syllabus. Our goal is to help students practice concepts clearly, confidently, and exam-ready through well-structured MCQs and revision content.