संवाद लेखन – Criteria MCQs Quiz | Class 9

यह प्रश्नोत्तरी कक्षा IX-X के ‘द्वितीय भाषा के रूप में हिंदी (कोड 085)’ विषय की ‘रचनात्मक लेखन प्रारूप’ इकाई के अंतर्गत ‘संवाद लेखन’ पर आधारित है। इसमें संवाद लेखन के मुख्य मानदंडों जैसे ‘सीमा में उद्देश्यपूर्ण संवाद’, ‘पात्रानुकूल भाषा’, ‘कोष्ठक में हाव-भाव संकेत’ और ‘विषय/मुद्दे पर अंत तक पूर्णता’ से संबंधित MCQ प्रश्न शामिल हैं। अपनी समझ का परीक्षण करने के लिए सभी प्रश्नों के उत्तर दें, ‘Submit Quiz’ बटन पर क्लिक करें और अपने परिणामों की समीक्षा करें। आप ‘Download Answer PDF’ बटन का उपयोग करके उत्तरों के साथ एक PDF भी डाउनलोड कर सकते हैं।

संवाद लेखन: एक विस्तृत मार्गदर्शिका

संवाद लेखन रचनात्मक लेखन का एक महत्वपूर्ण अंग है, जिसमें दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच बातचीत को लिखा जाता है। एक प्रभावी संवाद न केवल पठनीय होता है, बल्कि वह पात्रों की भावनाओं, स्थिति और विषय को भी स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करता है। CBSE परीक्षाओं में इसके महत्व को देखते हुए, संवाद लेखन के कुछ प्रमुख मानदंडों को समझना अत्यंत आवश्यक है।

संवाद लेखन के प्रमुख मानदंड:

1. सीमा में उद्देश्यपूर्ण संवाद (Purposeful Dialogue within Limits):

संवाद का मुख्य लक्ष्य दिए गए विषय या मुद्दे पर केंद्रित रहना है। इसमें अनावश्यक विस्तार या भटकना नहीं होना चाहिए। हर वाक्य का कोई न कोई उद्देश्य होना चाहिए, जो कहानी या परिस्थिति को आगे बढ़ाए। संवाद संक्षिप्त और सार्थक होने चाहिए ताकि पाठक की रुचि बनी रहे।

  • ध्यान दें: संवाद के माध्यम से जानकारी स्पष्ट रूप से प्रस्तुत होनी चाहिए, लेकिन यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि संवाद अत्यधिक लंबा या उबाऊ न हो जाए।

2. पात्रानुकूल भाषा (Character-Appropriate Language):

संवाद की भाषा पात्रों की उम्र, सामाजिक स्थिति, शिक्षा, संबंध और मनोदशा के अनुसार होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, एक बच्चा बड़ों से अलग तरीके से बात करेगा, और एक दोस्त अपने दोस्त से अलग भाषा का प्रयोग करेगा। एक औपचारिक बैठक में भाषा औपचारिक होगी, जबकि अनौपचारिक बातचीत में बोलचाल के शब्दों का प्रयोग किया जा सकता है।

  • उदाहरण:
    • एक शिक्षक और छात्र: औपचारिक, सम्मानजनक भाषा।
    • दो पुराने मित्र: अनौपचारिक, सरल, कभी-कभी मुहावरेदार भाषा।
    • एक दुकानदार और ग्राहक: सामान्य व्यावसायिक भाषा।

3. कोष्ठक में हाव-भाव संकेत (Gestures/Expressions in Parentheses):

संवाद में केवल बोले गए शब्द ही नहीं होते, बल्कि पात्रों के हाव-भाव, क्रियाएं और भावनाएं भी महत्वपूर्ण होती हैं। इन्हें कोष्ठक में संक्षिप्त रूप से लिखा जाता है। ये संकेत पाठक को पात्रों की मनोदशा और दृश्य की कल्पना करने में मदद करते हैं।

  • उदाहरण:
    • (हंसते हुए)
    • (आश्चर्यचकित होकर)
    • (गुस्से में)
    • (सोचते हुए)
    • (चारों ओर देखते हुए)
  • ये संकेत संवाद को अधिक सजीव और प्रभावशाली बनाते हैं।

4. विषय/मुद्दे पर अंत तक पूर्णता (Completeness on the Topic/Issue till the End):

संवाद का अंत तार्किक और संतोषजनक होना चाहिए। संवाद शुरू हुए मुद्दे को अंत तक हल करना चाहिए या उस पर एक स्पष्ट निष्कर्ष प्रस्तुत करना चाहिए। संवाद को बीच में ही अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए, जिससे पाठक को लगे कि बात अधूरी रह गई। इसमें समस्या का समाधान, सहमति या असहमति का बिंदु या आगे की कार्रवाई का संकेत हो सकता है।

त्वरित पुनरावृत्ति:

  • उद्देश्य: संवाद छोटा, सार्थक और विषय केंद्रित हो।
  • भाषा: पात्रों के अनुकूल हो, उनकी पृष्ठभूमि और मनोदशा दर्शाए।
  • संकेत: कोष्ठक में हाव-भाव और क्रियाएं जोड़ें।
  • समाप्ति: विषय को तार्किक अंत तक पहुंचाए।

अभ्यास के लिए अतिरिक्त प्रश्न (Additional Practice Questions):

  1. अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य और एक अभिभावक के बीच विद्यालय में अनुपस्थित रहने वाले छात्रों के मुद्दे पर संवाद लिखिए।
  2. दो दोस्तों के बीच ऑनलाइन पढ़ाई के फायदे और नुकसान पर संवाद लिखिए।
  3. एक दुकानदार और ग्राहक के बीच खराब वस्तु की शिकायत को लेकर संवाद की रचना कीजिए।
  4. अपने बड़े भाई-बहन और आपके बीच भविष्य की करियर योजनाओं पर संवाद प्रस्तुत कीजिए।
  5. स्वच्छता अभियान पर दो पड़ोसियों के बीच बातचीत को संवाद के रूप में लिखिए।