चित्र-वर्णन – Criteria MCQs Quiz | Class 9
यह क्विज कक्षा IX-X के ‘द्वितीय भाषा के रूप में हिंदी (कोड 085)’ विषय के ‘Creative Writing Formats’ यूनिट के ‘चित्र-वर्णन’ टॉपिक पर आधारित है। इसमें परिवेश-समझ, सूक्ष्म विवरण, दृश्यानुकूल भाषा, क्रमबद्धता/तारतम्यता और प्रभावी अभिव्यक्ति जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है। अपने ज्ञान का परीक्षण करने के लिए सभी 10 प्रश्नों को हल करें और अपनी प्रगति की जांच करने के लिए ‘Submit Quiz’ पर क्लिक करें। आप अपने परिणाम और सही उत्तरों के साथ एक PDF भी डाउनलोड कर सकते हैं।
चित्र-वर्णन: मानदंड और महत्वपूर्ण बिंदु
चित्र-वर्णन एक कला है जहाँ आप किसी चित्र में दी गई जानकारी को शब्दों के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं। इसका उद्देश्य चित्र को इस प्रकार सजीव करना है कि पाठक उसे अपनी कल्पना में देख सके। CBSE पाठ्यक्रम के अनुसार, चित्र-वर्णन के कुछ प्रमुख मानदंड हैं जिनकी समझ आवश्यक है।
मुख्य मानदंड और उनकी व्याख्या:
- परिवेश-समझ (Understanding the Environment/Context):
चित्र को देखते ही सबसे पहले उसके समग्र वातावरण, स्थिति और मुख्य विषय को समझना महत्वपूर्ण है। इसमें चित्र का मूड (खुशी, उदासी, शांति आदि), समय (सुबह, शाम, दिन), स्थान (शहर, गाँव, जंगल) और प्रमुख क्रियाकलाप शामिल होते हैं। एक अच्छी परिवेश-समझ वर्णन को सही दिशा देती है।
- सूक्ष्म विवरण (Minute Details):
केवल मुख्य वस्तुओं का वर्णन करना ही पर्याप्त नहीं है। एक प्रभावी चित्र-वर्णन में छोटी-छोटी और बारीक बातों, जैसे रंगों के शेड्स, आकृतियों, लोगों के चेहरे के भाव, पृष्ठभूमि में मौजूद छोटे तत्व, और हर वस्तु की स्थिति पर भी ध्यान देना चाहिए। ये सूक्ष्म विवरण चित्र को अधिक यथार्थवादी और आकर्षक बनाते हैं।
- दृश्यानुकूल भाषा (Descriptive Language):
भाषा ऐसी होनी चाहिए जो पाठक के मन में चित्र को साकार कर दे। इसमें उपयुक्त विशेषणों, क्रिया-विशेषणों और मुहावरों का प्रयोग शामिल है। कल्पनाशील और बिंबात्मक भाषा का उपयोग करके पाठक को ऐसा महसूस कराना चाहिए जैसे वह स्वयं चित्र को देख रहा हो। उदाहरण के लिए, ‘हरा पेड़’ की जगह ‘लहलहाता हरा पेड़’ या ‘ऊँचे-ऊँचे वृक्ष’ कहना अधिक प्रभावी होगा।
- क्रमबद्धता/तारतम्यता (Sequence/Coherence):
वर्णन को एक निश्चित और तार्किक क्रम में प्रस्तुत करना चाहिए। यह क्रम चित्र को समझने में मदद करता है। आमतौर पर, वर्णन की शुरुआत चित्र के सामान्य अवलोकन से होती है, फिर विशिष्ट विवरणों पर जाया जाता है। आप पृष्ठभूमि से अग्रभूमि की ओर, ऊपर से नीचे की ओर, या बाईं से दाईं ओर का क्रम अपना सकते हैं। वर्णन में विचारों का प्रवाह और तारतम्यता बनी रहनी चाहिए।
- प्रभावी अभिव्यक्ति (Effective Expression):
अपनी बात को स्पष्ट, संक्षिप्त, और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करना ही प्रभावी अभिव्यक्ति है। इसमें भाषा की शुद्धता, व्याकरणिक त्रुटियों से मुक्ति, और उचित शब्द-चयन शामिल है। वर्णन अनावश्यक रूप से लंबा या दोहराव वाला नहीं होना चाहिए। आपका वर्णन पाठक को आकर्षित करे और चित्र के प्रति उसकी रुचि जगाए।
चित्र-वर्णन में क्या करें और क्या न करें:
| क्या करें (Do’s) | क्या न करें (Don’ts) |
|---|---|
| चित्र को ध्यान से देखें और समझें। | केवल वस्तुओं के नाम गिनाएँ। |
| मनोभावों और वातावरण का वर्णन करें। | चित्र से संबंधित काल्पनिक कहानियाँ गढ़ें। |
| सटीक और प्रभावशाली शब्दों का प्रयोग करें। | अस्पष्ट या अनावश्यक रूप से कठिन शब्दों का प्रयोग करें। |
| वर्णन को तार्किक क्रम में लिखें। | वाक्य छोटे और अधूरे रखें। |
| व्याकरणिक शुद्धता का ध्यान रखें। | वर्तनी और व्याकरण की गलतियाँ करें। |
त्वरित पुनरावलोकन (Quick Revision):
- चित्र के केंद्र बिंदु और उसके आसपास के माहौल को समझें।
- प्रत्येक छोटी से छोटी वस्तु पर भी ध्यान दें।
- ऐसी भाषा का प्रयोग करें जो चित्र को पाठक की आँखों के सामने ले आए।
- वर्णन को एक व्यवस्थित और तार्किक क्रम में प्रस्तुत करें।
- अपने विचारों को स्पष्ट और प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करें।
अभ्यास प्रश्न (Practice Questions):
- चित्र-वर्णन में ‘परिवेश-समझ’ का क्या अर्थ है?
- चित्र के आकार का ज्ञान।
- चित्र के केंद्रीय विषय, वातावरण और मनोभावों को समझना।
- चित्र के रंगों को पहचानना।
- चित्रकार का नाम जानना।
- चित्र-वर्णन को प्रभावी बनाने के लिए किस प्रकार की भाषा का प्रयोग करना चाहिए?
- कठिन और तकनीकी भाषा।
- सरल और नीरस भाषा।
- कल्पनाशील और बिंबात्मक भाषा।
- केवल संज्ञाओं का प्रयोग।
- ‘क्रमबद्धता’ का पालन न करने पर चित्र-वर्णन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
- वर्णन अधिक रोचक लगेगा।
- पाठक को चित्र समझने में कठिनाई होगी।
- वर्णन छोटा हो जाएगा।
- वर्णन अधिक प्रभावशाली होगा।
- ‘सूक्ष्म विवरण’ के अंतर्गत आप किस प्रकार की जानकारी शामिल करेंगे?
- केवल चित्र का सामान्य परिचय।
- मुख्य वस्तुओं के साथ-साथ छोटी-छोटी बातों, जैसे रंगों के शेड्स, चेहरों के भाव।
- चित्र के इतिहास के बारे में जानकारी।
- चित्र की कीमत।
- एक सफल चित्र-वर्णन की अंतिम कुंजी क्या है?
- लंबे और जटिल वाक्य लिखना।
- प्रभावी और स्पष्ट अभिव्यक्ति, साथ ही व्याकरणिक शुद्धता।
- चित्र में अपनी निजी राय शामिल करना।
- बहुत सारे पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग करना।

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