पत्र लेखन – Criteria MCQs Quiz | Class 9

यह क्विज़ CBSE Class IX-X के छात्रों के लिए है, जिसमें ‘द्वितीय भाषा के रूप में हिंदी (Code 085)’ विषय के ‘Creative Writing Formats’ यूनिट के ‘पत्र लेखन’ टॉपिक को कवर किया गया है। इसमें अनौपचारिक पत्रों की सरल, संक्षिप्त, मैत्रीपूर्ण विशेषताओं और औपचारिक पत्रों में स्पष्ट/प्रभावी संप्रेषण, प्रारूप-औपचारिकताएँ, तथ्य-संक्षिप्तता-संपूर्णता जैसे मानदंडों पर आधारित प्रश्न शामिल हैं। क्विज़ को हल करने के लिए सभी 10 प्रश्नों के उत्तर दें और अपना परिणाम जानने के लिए ‘Submit Quiz’ बटन पर क्लिक करें। आप अपने उत्तरों की समीक्षा कर सकते हैं और ‘Download Answer PDF’ बटन का उपयोग करके एक विस्तृत PDF रिपोर्ट डाउनलोड कर सकते हैं।

पत्र लेखन: एक विस्तृत मार्गदर्शिका

पत्र लेखन संचार का एक महत्वपूर्ण और प्रभावी माध्यम है, जिसका उपयोग व्यक्तिगत और व्यावसायिक दोनों उद्देश्यों के लिए किया जाता है। पत्रों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है: अनौपचारिक पत्र और औपचारिक पत्र। प्रत्येक श्रेणी के अपने विशिष्ट उद्देश्य, संरचना और शैली होती है, जिन्हें समझना सफल संप्रेषण के लिए आवश्यक है।

अनौपचारिक पत्र (Informal Letters)

अनौपचारिक पत्र वे होते हैं जो हम अपने सगे-संबंधियों, मित्रों या परिचितों को लिखते हैं। इन पत्रों का मुख्य उद्देश्य व्यक्तिगत भावनाओं, विचारों और सूचनाओं का आदान-प्रदान करना होता है।

  • सरल: इनकी भाषा सीधी, सरल और सहज होती है। इसमें मुहावरेदार या साहित्यिक भाषा का प्रयोग किया जा सकता है।
  • संक्षिप्त: अनावश्यक विस्तार से बचते हुए अपनी बात को स्पष्टता से कहना चाहिए, हालांकि औपचारिक पत्रों जितनी कठोर संक्षिप्तता नहीं होती।
  • मैत्रीपूर्ण: पत्र का लहजा आत्मीय और स्नेहपूर्ण होता है, जो लिखने वाले और प्राप्तकर्ता के बीच के व्यक्तिगत संबंध को दर्शाता है। इसमें व्यक्तिगत बातें और भावनाएँ खुलकर व्यक्त की जा सकती हैं।
  • उदाहरण: मित्र को जन्मदिन की बधाई, परिवार के सदस्य को हालचाल बताना, निमंत्रण देना।

औपचारिक पत्र (Formal Letters)

औपचारिक पत्र व्यावसायिक, सरकारी, कार्यालयीन या संस्थागत उद्देश्यों के लिए लिखे जाते हैं। ये पत्र किसी अधिकारी, संपादक, प्रधानाचार्य, व्यवसायी या अज्ञात व्यक्ति को लिखे जाते हैं। इनमें औपचारिकता और मर्यादा का पालन करना अनिवार्य होता है।

  • स्पष्ट/प्रभावी संप्रेषण: संदेश बिल्कुल स्पष्ट और सीधा होना चाहिए ताकि प्राप्तकर्ता को कोई भ्रम न हो। प्रभावी संप्रेषण के लिए शब्दों का चयन सटीक होना चाहिए।
  • प्रारूप-औपचारिकताएँ: इन पत्रों का एक निश्चित प्रारूप होता है जिसका सख्ती से पालन करना होता है। इसमें प्रेषक का पता, प्राप्तकर्ता का पता, दिनांक, विषय, संबोधन, मुख्य भाग, समापन और हस्ताक्षर आदि का क्रम निर्धारित होता है।
  • तथ्य-संक्षिप्तता-संपूर्णता: पत्र में केवल तथ्यों और आवश्यक सूचनाओं का ही उल्लेख होना चाहिए। बात संक्षेप में कहनी चाहिए, लेकिन उसमें सभी आवश्यक जानकारी (संपूर्णता) शामिल होनी चाहिए। व्यक्तिगत भावनाओं के लिए कोई स्थान नहीं होता।
  • उदाहरण: आवेदन पत्र, शिकायत पत्र, संपादक को पत्र, व्यावसायिक पत्र।

अनौपचारिक और औपचारिक पत्रों में अंतर (मुख्य मानदंड)

विशेषता अनौपचारिक पत्र औपचारिक पत्र
उद्देश्य व्यक्तिगत संबंध, भावनाएँ व्यावसायिक, सरकारी, शिकायत
प्रेषक/प्राप्तकर्ता मित्र, परिवार, रिश्तेदार अधिकारी, संपादक, व्यवसायी, प्रधानाचार्य
भाषा सरल, आत्मीय, भावात्मक स्पष्ट, संक्षिप्त, विनम्र, तथ्यपरक
प्रारूप लचीला निश्चित और कठोर
अभिवादन/समापन प्रिय, नमस्ते, तुम्हारा महोदय, भवदीय, सादर

त्वरित पुनरीक्षण (Quick Revision)

  • अनौपचारिक पत्र व्यक्तिगत होते हैं, औपचारिक पत्र उद्देश्य-आधारित।
  • अनौपचारिक में भावनाएँ, औपचारिक में तथ्य महत्वपूर्ण।
  • अनौपचारिक की भाषा सरल और मैत्रीपूर्ण, औपचारिक की स्पष्ट और संक्षिप्त।
  • औपचारिक पत्रों में निश्चित प्रारूप का पालन अनिवार्य है।
  • विषय और प्रेषक/प्राप्तकर्ता का पता औपचारिक पत्रों का अभिन्न अंग है।

अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न (Additional Practice Questions)

  1. अपने क्षेत्र में बढ़ती गंदगी की शिकायत करते हुए नगर निगम अधिकारी को एक पत्र लिखिए।
  2. अपने छोटे भाई को समय का सदुपयोग करने की सलाह देते हुए एक पत्र लिखिए।
  3. अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य को अवकाश के लिए आवेदन पत्र लिखिए।
  4. बैंक मैनेजर को अपना बचत खाता बंद करने के लिए एक पत्र लिखिए।
  5. अपनी दादी को उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछते हुए एक पत्र लिखिए।