पत्र लेखन – Criteria MCQs Quiz | Class 9
कक्षा IX-X के लिए हिंदी (कोर्स A) / हिंदी मातृभाषा (कोड 002) विषय की इकाई ‘रचनात्मक लेखन प्रारूप’ पर आधारित ‘पत्र लेखन – Criteria MCQs Quiz | Class 9’ प्रस्तुत है। इसमें अनौपचारिक पत्रों की सरलता, मैत्रीपूर्णता और संक्षिप्तता के साथ-साथ औपचारिक पत्रों में स्पष्ट/प्रभावी संप्रेषण, प्रारूप-औपचारिकताएँ और तथ्य-संक्षिप्तता-संपूर्णता जैसे महत्वपूर्ण मानदंड शामिल हैं। अपनी तैयारी का मूल्यांकन करने के लिए क्विज़ सबमिट करें और विस्तृत परिणाम तथा उत्तर सहित पीडीएफ डाउनलोड करें।
पत्र लेखन: एक विस्तृत मार्गदर्शिका
पत्र लेखन, चाहे वह औपचारिक हो या अनौपचारिक, प्रभावी संचार का एक महत्वपूर्ण साधन है। यह हमें अपने विचारों, भावनाओं या जानकारी को लिखित रूप में व्यक्त करने में मदद करता है। कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में पत्र लेखन के विभिन्न प्रारूपों और उनके मानदंडों को समझना आवश्यक है।
पत्र लेखन के मुख्य प्रकार और उनके मानदंड:
1. अनौपचारिक पत्र (Informal Letters)
अनौपचारिक पत्र उन व्यक्तियों को लिखे जाते हैं जिनसे हमारे व्यक्तिगत या पारिवारिक संबंध होते हैं, जैसे माता-पिता, भाई-बहन, मित्र, रिश्तेदार आदि।
- सरल और मैत्रीपूर्ण भाषा: इन पत्रों में भाषा सरल, सहज और व्यक्तिगत होती है। इसमें आत्मीयता और भावनात्मक अभिव्यक्ति को महत्व दिया जाता है।
- संक्षिप्तता: अनावश्यक विस्तार से बचें, लेकिन भावनाओं को व्यक्त करने में संकोच न करें। पत्र को बहुत लंबा नहीं होना चाहिए।
- व्यक्तिगत संबंध: ये पत्र व्यक्तिगत सुख-दुख, बधाई, निमंत्रण, संवेदना या सामान्य बातचीत के लिए लिखे जाते हैं।
- कोई निश्चित प्रारूप नहीं: औपचारिक पत्रों की तरह इनमें कोई कठोर प्रारूप नहीं होता, हालांकि संबोधन और समापन में संबंधानुसार आत्मीयता झलकनी चाहिए।
2. औपचारिक पत्र (Formal Letters)
औपचारिक पत्र उन व्यक्तियों या संस्थानों को लिखे जाते हैं जिनसे हमारा व्यक्तिगत संबंध नहीं होता। ये पत्र आधिकारिक, व्यावसायिक या सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए होते हैं।
- स्पष्ट/प्रभावी संप्रेषण: पत्र का उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट होना चाहिए। भाषा सटीक, संक्षिप्त और विषय-केंद्रित होनी चाहिए ताकि संदेश प्रभावी ढंग से संप्रेषित हो सके।
- प्रारूप-औपचारिकताएँ: औपचारिक पत्रों में एक निश्चित और मानक प्रारूप का पालन करना अनिवार्य है। इसमें प्रेषक का पता, दिनांक, प्राप्तकर्ता का पता, विषय, संबोधन, मुख्य भाग, समापन और हस्ताक्षर आदि क्रमबद्ध तरीके से होने चाहिए।
- तथ्य-संक्षिप्तता-संपूर्णता: पत्र में केवल प्रासंगिक तथ्यों और जानकारी को ही शामिल किया जाना चाहिए। जानकारी संक्षिप्त हो, लेकिन अधूरी न हो, बल्कि पूर्ण और सटीक होनी चाहिए। अनावश्यक विस्तार से बचना चाहिए।
- विनम्रता और शिष्टाचार: भाषा विनम्र और सम्मानजनक होनी चाहिए, भले ही पत्र शिकायत या विरोध का हो।
औपचारिक और अनौपचारिक पत्र में अंतर:
| मापदंड | अनौपचारिक पत्र | औपचारिक पत्र |
|---|---|---|
| उद्देश्य | व्यक्तिगत बातचीत, संबंध व्यक्त करना | आधिकारिक, व्यावसायिक, सार्वजनिक |
| भाषा | सरल, आत्मीय, भावनात्मक | शिष्ट, सटीक, विषय-केंद्रित |
| प्रारूप | लचीला, कम औपचारिक | निश्चित, मानक, कठोर |
| संबोधन | प्रिय, आदरणीय, पूज्य | मान्यवर, महोदय/महोदया, श्रीमान/श्रीमती |
| समापन | तुम्हारा/तुम्हारी, आपका/आपकी | भवदीय, प्रार्थी, निवेदक, आपका आज्ञाकारी |
| विषय | अनिवार्य नहीं | अनिवार्य (संक्षिप्त और स्पष्ट) |
त्वरित पुनरावृत्ति (Quick Revision):
- अनौपचारिक पत्र – व्यक्तिगत संबंध, सरल भाषा, कोई कठोर प्रारूप नहीं।
- औपचारिक पत्र – आधिकारिक उद्देश्य, निश्चित प्रारूप, स्पष्ट व संक्षिप्त संदेश।
- औपचारिक पत्रों में विषय, संबोधन, समापन की औपचारिकताएं महत्वपूर्ण हैं।
- अनौपचारिक पत्रों में भावनाओं और आत्मीयता की अभिव्यक्ति महत्वपूर्ण है।
- दोनों प्रकार के पत्रों में भाषा की स्पष्टता और शुद्धता आवश्यक है।
अभ्यास प्रश्न (Practice Questions):
- अपने मित्र को जन्मदिन की बधाई देते हुए एक अनौपचारिक पत्र लिखें।
- विद्यालय के प्रधानाचार्य को अवकाश के लिए प्रार्थना पत्र लिखें।
- बैंक प्रबंधक को पासबुक खो जाने की शिकायत करते हुए एक औपचारिक पत्र का प्रारूप तैयार करें।
- अपने छोटे भाई को पढ़ाई में मन लगाने और मोबाइल का कम उपयोग करने की सलाह देते हुए पत्र लिखें।
- किसी समाचार पत्र के संपादक को अपने क्षेत्र की बिजली समस्या पर ध्यान आकर्षित करने के लिए पत्र लिखें।
पत्र लेखन एक कला है जिसे नियमित अभ्यास से निखारा जा सकता है। ऊपर दिए गए मानदंडों और प्रारूपों का ध्यान रखकर आप प्रभावी पत्र लिख सकते हैं।

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