कारक एवं उपपद विभक्ति (प्रयोग समूह) बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी | कक्षा 9
कक्षा: नवमी, विषय: संस्कृत (122), इकाई: ग-विभाग: व्याकरणम्, विषय: कारक एवं उपपद विभक्ति (प्रयोग समूह) बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी। इस प्रश्नोत्तरी में तृतीया विभक्ति के विशेष प्रयोगों (सह, साकम्, समम्, सार्धम्, विना, अलम्, सदृश, हीन) से संबंधित प्रश्न हैं। सभी प्रश्नों का उत्तर दें और अंत में अपना परिणाम देखने तथा उत्तर-पुस्तिका की PDF डाउनलोड करने के लिए ‘Submit Quiz’ बटन पर क्लिक करें।
कारक एवं उपपद विभक्ति (तृतीया विभक्ति प्रयोग)
परिचय
संस्कृत व्याकरण में ‘कारक’ वे तत्व हैं जो क्रिया के साथ सीधा संबंध रखते हैं। ‘विभक्ति’ इन कारकों को प्रकट करने वाले प्रत्यय हैं। जहाँ कारक क्रिया के अनुसार निर्धारित होते हैं (जैसे कर्ता, कर्म, करण आदि), वहीं ‘उपपद विभक्ति’ कुछ विशेष पदों (शब्दों) के योग में आने वाली विभक्ति को कहते हैं। यहाँ क्रिया का सीधा संबंध महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि पद विशेष का सान्निध्य ही विभक्ति का कारण बनता है। इस खंड में हम तृतीया विभक्ति के ऐसे ही कुछ महत्वपूर्ण उपपद प्रयोगों का अध्ययन करेंगे।
तृतीया विभक्ति के उपपद प्रयोग
तृतीया विभक्ति का मुख्य प्रयोग ‘करण कारक’ में होता है, जिसका अर्थ है ‘साधन’ या ‘सहायक’। उदाहरणार्थ, “रामः बाणेन रावणं हन्ति” (राम बाण से रावण को मारता है), यहाँ ‘बाण’ मारने का साधन है, अतः इसमें तृतीया है। परन्तु, कुछ विशेष शब्दों के योग में भी तृतीया विभक्ति का प्रयोग होता है, भले ही वे करण कारक न हों। इन्हें ‘उपपद विभक्ति’ कहते हैं।
1. सह, साकम्, समम्, सार्धम् (साथ)
इन सभी अव्ययों का अर्थ ‘साथ’ होता है। इनके योग में हमेशा तृतीया विभक्ति का प्रयोग होता है।
- सह: रामः सीतया सह वनं गच्छति। (राम सीता के साथ वन जाता है।)
- साकम्: शिष्यः गुरुणा साकम् पठति। (शिष्य गुरु के साथ पढ़ता है।)
- समम्: मित्रं मित्रेण समम् क्रीडति। (मित्र मित्र के साथ खेलता है।)
- सार्धम्: जनकः पुत्रेण सार्धम् वार्तालापं करोति। (पिता पुत्र के साथ बातचीत करता है।)
2. विना (के बिना)
‘विना’ अव्यय का अर्थ ‘के बिना’ होता है। इसके योग में द्वितीया, तृतीया और पंचमी तीनों विभक्तियाँ हो सकती हैं, परन्तु यहाँ हम तृतीया के प्रयोग पर ध्यान देंगे।
- विना: जलेन विना जीवनं न सम्भवति। (जल के बिना जीवन संभव नहीं है।)
- ज्ञानेन विना सुखं कुतः? (ज्ञान के बिना सुख कहाँ?)
3. अलम् (बस करो / पर्याप्त)
‘अलम्’ अव्यय का प्रयोग दो अर्थों में होता है:
- निषेधार्थक (बस करो): जब ‘अलम्’ का अर्थ ‘बस करो’ या ‘मत करो’ होता है, तब इसके योग में तृतीया विभक्ति का प्रयोग होता है।
- अलम्: विवादेन अलम्। (विवाद बस करो।)
- कोलाहलेन अलम्। (शोरगुल बस करो।)
- पर्याप्तार्थक (पर्याप्त): जब ‘अलम्’ का अर्थ ‘पर्याप्त’ होता है, तब इसके योग में चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग होता है। (जैसे – रावणाय रामः अलम्। राम रावण के लिए पर्याप्त है।) परन्तु हमारे संदर्भ में तृतीया विभक्ति वाला प्रयोग ही अपेक्षित है।
4. सदृश (समान)
‘सदृश’ विशेषण का अर्थ ‘समान’ या ‘जैसा’ होता है। इसके योग में तृतीया विभक्ति का प्रयोग होता है।
- सदृश: सः पित्रा सदृशः अस्ति। (वह पिता के समान है।)
- रामेण सदृशः कोऽपि नास्ति। (राम के समान कोई नहीं है।)
5. हीन (रहित)
‘हीन’ विशेषण का अर्थ ‘रहित’ या ‘कम’ होता है। इसके योग में तृतीया विभक्ति का प्रयोग होता है।
- हीन: धनेन हीनः निर्धनः कथ्यते। (धन से रहित निर्धन कहा जाता है।)
- गुणैः हीनः नरः न शोभते। (गुणों से रहित मनुष्य शोभा नहीं देता।)
सारांश सारणी
| उपपद अव्यय/विशेषण | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| सह, साकम्, समम्, सार्धम् | साथ | शिष्यः गुरुणा सह/साकम्/समम्/सार्धम् विद्यालयं गच्छति। |
| विना | के बिना | परिश्रमेण विना सफलता न भवति। |
| अलम् (निषेधार्थक) | बस करो, मत करो | हसितेन अलम्। |
| सदृश | समान, जैसा | मात्रा सदृशः पुत्रः। |
| हीन | रहित, विहीन | बुद्ध्या हीनः नरः। |
त्वरित पुनरावलोकन
- उपपद विभक्ति क्रिया के कारण न होकर विशेष पद के योग के कारण होती है।
- ‘सह’, ‘साकम्’, ‘समम्’, ‘सार्धम्’ के योग में तृतीया विभक्ति होती है।
- ‘विना’ के योग में द्वितीया, तृतीया या पंचमी हो सकती है, यहाँ तृतीया पर बल।
- ‘अलम्’ (निषेधार्थक) के योग में तृतीया विभक्ति होती है।
- ‘सदृश’ और ‘हीन’ के योग में तृतीया विभक्ति होती है।
अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न
- जलम् ______ मत्स्यः जीवितुं न शक्नोति।
- जलात्
- जलस्य
- जलेन
- जलाय
- मात्रा ______ पुत्रः गृहं गच्छति। (सह)
- मातुः
- मातरम्
- मात्रा
- मातरि
- शत्रुभिः ______ युद्धम् अलम्।
- युद्धम्
- युद्धस्य
- युद्धेन
- युद्धे
- सः राज्ञा ______ सदृशः अस्ति।
- राज्ञः
- राज्ञे
- राज्ञा
- राजानम्
- धनैः ______ पुरुषः कष्टं अनुभवति।
- धनात्
- धनेन
- धनैः
- धनाय