लघु उत्तरीय प्रश्न (25-30 शब्द) MCQ प्रश्नोत्तरी | कक्षा 9
यह प्रश्नोत्तरी कक्षा IX के विषय हिंदी कोर्स ‘ए’ (कोड 002) के इकाई ‘गद्य खंड (क्षितिज भाग 1)’ पर आधारित है। इस क्विज़ का विषय ‘लघु उत्तरीय प्रश्न (25-30 शब्द)’ है। परीक्षा पैटर्न के अनुसार, इस खंड से 4 में से 3 प्रश्न करने होते हैं, प्रत्येक प्रश्न 2 अंक का होता है (2×3=6 अंक)। सभी प्रश्नों को हल करने के बाद, अपना स्कोर देखने के लिए ‘सबमिट क्विज़’ पर क्लिक करें और उत्तरों की समीक्षा करने के लिए ‘आंसर PDF डाउनलोड करें’।
महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री: गद्य खंड (क्षितिज भाग 1)
यह खंड हिंदी गद्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, निबंध, यात्रा-वृत्तांत और संस्मरण से आपका परिचय कराता है। इन पाठों का उद्देश्य छात्रों में सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय मूल्यों की समझ विकसित करना है।
प्रमुख पाठों के मुख्य बिंदु
1. दो बैलों की कथा (प्रेमचंद)
यह कहानी हीरा और मोती नाम के दो बैलों के माध्यम से किसानों और जानवरों के बीच भावनात्मक संबंध को दर्शाती है। यह स्वतंत्रता के महत्व और उसके लिए किए गए संघर्ष का भी प्रतीक है। कहानी बताती है कि जानवर भी प्रेम, मित्रता और स्वतंत्रता की भावना को समझते हैं।
2. ल्हासा की ओर (राहुल सांकृत्यायन)
यह एक यात्रा-वृत्तांत है जिसमें लेखक अपनी तिब्बत यात्रा के अनुभवों का वर्णन करते हैं। इसमें उस समय के तिब्बती समाज, संस्कृति, भौगोलिक स्थिति और यात्रा की कठिनाइयों का सजीव चित्रण है। लेखक ने डाँकुओं के भय और सामाजिक व्यवस्था पर भी प्रकाश डाला है।
3. उपभोक्तावाद की संस्कृति (श्यामाचरण दुबे)
यह निबंध बाजारवाद और विज्ञापन की दुनिया के प्रभाव पर एक गंभीर टिप्पणी है। लेखक बताते हैं कि कैसे विज्ञापन हमें अनावश्यक चीजें खरीदने के लिए प्रेरित करते हैं और हम अपनी परंपराओं को भूलकर दिखावे की संस्कृति अपना रहे हैं, जिससे समाज में अशांति और असमानता बढ़ रही है।
4. साँवले सपनों की याद (जाबिर हुसैन)
यह एक संस्मरण है जो प्रसिद्ध पक्षी-विज्ञानी सालिम अली को समर्पित है। लेखक ने उनकी मृत्यु से उत्पन्न दुख और खालीपन को व्यक्त किया है। इसमें सालिम अली के प्रकृति और पक्षियों के प्रति गहरे प्रेम और समर्पण का भावुक चित्रण है।
5. प्रेमचंद के फटे जूते (हरिशंकर परसाई)
यह एक व्यंग्यात्मक निबंध है जिसमें लेखक प्रेमचंद के फटे जूते वाले चित्र को देखकर उनके सादगी भरे व्यक्तित्व और सिद्धांतों पर अटल रहने की प्रवृत्ति का विश्लेषण करते हैं। यह लेख सामाजिक दिखावे और अवसरवादिता पर गहरा कटाक्ष है।
| पाठ का नाम | लेखक का नाम | विधा |
|---|---|---|
| दो बैलों की कथा | प्रेमचंद | कहानी |
| ल्हासा की ओर | राहुल सांकृत्यायन | यात्रा-वृत्तांत |
| उपभोक्तावाद की संस्कृति | श्यामाचरण दुबे | निबंध |
| साँवले सपनों की याद | जाबिर हुसैन | संस्मरण |
| प्रेमचंद के फटे जूते | हरिशंकर परसाई | व्यंग्य |
| मेरे बचपन के दिन | महादेवी वर्मा | संस्मरण |
त्वरित पुनरीक्षण (Quick Revision)
- स्वतंत्रता का मूल्य: ‘दो बैलों की कथा’ हमें सिखाती है कि आजादी आसानी से नहीं मिलती, उसके लिए संघर्ष करना पड़ता है।
- सामाजिक यथार्थ: ‘ल्हासा की ओर’ उस समय के तिब्बती समाज की कानून-व्यवस्था और जीवन-शैली का परिचय देता है।
- बाजार का प्रभाव: ‘उपभोक्तावाद की संस्कृति’ हमें विज्ञापनों से प्रभावित होकर अंधी दौड़ में शामिल होने से सचेत करती है।
- प्रकृति प्रेम: ‘साँवले सपनों की याद’ सालिम अली के माध्यम से हमें प्रकृति और पक्षियों से प्रेम करने की प्रेरणा देती है।
- सादगी और स्वाभिमान: ‘प्रेमचंद के फटे जूते’ सामाजिक दिखावे पर चोट करते हुए सादा जीवन और उच्च विचार के महत्व को रेखांकित करता है।
अभ्यास के लिए अतिरिक्त प्रश्न
- ‘दो बैलों की कथा’ के माध्यम से प्रेमचंद ने कृषक समाज और पशुओं के भावनात्मक संबंधों के बारे में क्या संदेश दिया है?
- तिब्बत में यात्रियों के लिए क्या-क्या कठिनाइयाँ थीं? ‘ल्हासा की ओर’ पाठ के आधार पर लिखिए।
- ‘उपभोक्तावाद की संस्कृति’ पाठ के अनुसार, हमारी सामाजिक नींव किस प्रकार खतरे में है?
- सालिम अली को ‘बर्ड-वाचर’ क्यों कहा गया है? उनके व्यक्तित्व की विशेषताएँ लिखिए।
- ‘प्रेमचंद के फटे जूते’ पाठ में लेखक ने आज के समाज की दिखावे की प्रवृत्ति पर किस प्रकार व्यंग्य किया है?