Term: Farmaishi Chakradar Tukra/Paran MCQs Quiz | Class 10
This quiz covers essential concepts from Class X, Subject: Hindustani Music Percussion Instruments (Code 036), Unit 1. Test your understanding of the terms Farmaishi Chakradar Tukra and Paran, including their definitions and characteristics as prepared or special chakradar compositions. Submit your answers and download a detailed PDF of your results.
परिचय
हिंदुस्तानी संगीत में ताल वाद्य अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, और इनमें ‘चक्रदार’ और ‘परन’ जैसी रचनाएँ अपनी जटिलता और सौंदर्य के लिए जानी जाती हैं। यह खंड आपको फरमाइशी चक्रदार टुकड़ा और परन की गहराई से समझ प्रदान करेगा, जो विशेष रूप से पखावज और तबले पर बजने वाली पारंपरिक बंदिशें हैं।
फरमाइशी चक्रदार टुकड़ा
फरमाइशी चक्रदार टुकड़ा एक विशेष प्रकार का चक्रदार टुकड़ा है जिसे अत्यंत सावधानी और तैयारी के साथ बनाया जाता है। ‘फरमाइशी’ शब्द का अर्थ ‘विशेष अनुरोध पर’ या ‘अत्यधिक नियोजित’ होता है, जो इसकी पूर्व-तैयारी और जटिल संरचना को दर्शाता है।
- परिभाषा: यह एक चक्रदार टुकड़ा है जिसकी बनावट में एक मुख्य बोल समूह (पल्ला) को तीन बार बजाया जाता है, और प्रत्येक बार बजाने के बाद एक तिहाई आती है। तीनों तिहाइयाँ मिलकर ‘सम’ पर समाप्त होती हैं। इसकी खासियत यह है कि यह आमतौर पर श्रोताओं की विशेष मांग पर नहीं बल्कि कलाकार द्वारा पहले से तैयार करके प्रस्तुत किया जाता है, जो इसकी रचनात्मकता और जटिलता को दर्शाता है।
- संरचना:
- पल्ला (Pallav): मुख्य बोलों का समूह जिसे दोहराया जाता है।
- तिहाई (Tihaai): एक ही बोल समूह को तीन बार बजाकर ‘सम’ पर आने की प्रक्रिया।
- चक्र (Chakra): पल्ले और तिहाई का एक पूरा सेट। एक फरमाइशी चक्रदार में ऐसे तीन चक्र होते हैं।
- विशेषताएँ:
- यह ‘तैयार’ (prepared) रचना होती है, जिसका अर्थ है कि इसे गहन अभ्यास और रचना-कौशल के साथ बनाया जाता है।
- इसकी बोल रचनाएँ अक्सर जोरदार और प्रभावशाली होती हैं।
- यह श्रोता पर गहरा प्रभाव छोड़ता है क्योंकि इसकी पुनरावृत्ति और सम पर सटीक वापसी अत्यंत कलात्मक होती है।
परन
‘परन’ एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ ‘पूर्ण’ या ‘श्रेष्ठ’ होता है। यह मुख्य रूप से पखावज वाद्य पर बजाई जाने वाली एक शक्तिशाली और गंभीर रचना है। हालाँकि, तबले पर भी परन बजाए जाते हैं, लेकिन उनकी मूल प्रकृति और बोल पखावज से उत्पन्न हुए हैं।
- परिभाषा: परन पखावज के विशिष्ट बोलों जैसे धें, गड़न, किटतक, धड़ान, आदि से बनी एक स्वतंत्र रचना है। इसमें भी चक्रदार की तरह एक निश्चित बोल समूह को तीन बार दोहराकर ‘सम’ पर आया जाता है, लेकिन परन की प्रकृति अधिक गंभीर और वीर रस प्रधान होती है।
- संरचना:
- पखावज के विशेष बोलों का प्रयोग।
- एक निश्चित बोल समूह का तीन बार दोहराव और तिहाई के साथ सम पर समाप्ति।
- विशेषताएँ:
- यह ‘वीर रस’ और ‘गंभीरता’ को दर्शाता है।
- पखावज के दमदार बोलों से युक्त।
- आमतौर पर तेज या मध्यम लय में बजाया जाता है।
- इसका उपयोग अक्सर शास्त्रीय नृत्य जैसे कथक में भी किया जाता है, जहाँ यह भाव और गति प्रदान करता है।
फरमाइशी चक्रदार टुकड़ा और परन में अंतर
| विशेषता | फरमाइशी चक्रदार टुकड़ा | परन |
|---|---|---|
| वाद्य | मुख्य रूप से तबला, लेकिन अन्य ताल वाद्य पर भी | मुख्य रूप से पखावज, तबले पर भी |
| प्रकृति | कलात्मक, जटिल, पूर्व-तैयार | दमदार, वीर रस प्रधान, गंभीर |
| बोल | तबले के बोल (धा, धिन, ता, तित, आदि) | पखावज के बोल (धें, गड़न, किटतक, आदि) |
| उद्देश्य | लयकारी और बोलों का कलात्मक प्रदर्शन | शक्ति, गंभीरता और वीर भाव का प्रदर्शन |
त्वरित पुनरीक्षण
- फरमाइशी चक्रदार टुकड़ा: तबले की पूर्व-तैयार जटिल रचना, तीन बार दोहराव, तिहाई के साथ सम।
- परन: पखावज की जोरदार रचना, वीर रस प्रधान, तीन बार दोहराव, तिहाई के साथ सम।
- दोनों ही ‘चक्रदार’ सिद्धांत पर आधारित हैं।
- ‘चक्रदार’ का अर्थ तीन बार दोहराकर सम पर आना है।
अभ्यास प्रश्न
- फरमाइशी चक्रदार टुकड़ा किन वाद्यों पर अधिक प्रचलित है?
अ) सितार और सरोद
ब) तबला और पखावज
स) बांसुरी और वायलिन
द) हारमोनियम और कीबोर्ड - ‘परन’ में किस रस की प्रधानता होती है?
अ) श्रृंगार रस
ब) हास्य रस
स) वीर रस
द) शांत रस - चक्रदार रचना में ‘तिहाई’ का मुख्य कार्य क्या है?
अ) रचना को लंबा करना
ब) सम पर सटीक वापसी दर्शाना
स) केवल बोलों को सजाना
द) गति को धीमा करना - पखावज के कौन से बोल परन में प्रमुखता से उपयोग किए जाते हैं?
अ) धा, धिन, ता
ब) धें, गड़न, किटतक
स) तीट, किट, तक
द) रकिट, तक, धीं - फरमाइशी चक्रदार टुकड़े और सामान्य चक्रदार टुकड़े में मुख्य अंतर क्या है?
अ) लंबाई का
ब) फरमाइशी चक्रदार की पूर्व-तैयारी और जटिलता का
स) वाद्यों का
द) ताल का

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