Theka Recitation: Tilwada (Dugun) MCQs Quiz | Class 10
कक्षा: X | विषय: हिंदुस्तानी संगीत (मेलॉडिक इंस्ट्रूमेंट्स) (कोड 035) | यूनिट: प्रैक्टिकल | टॉपिक: ठेका गायन: तिलवाड़ा (दुगुन) MCQs क्विज। यह क्विज तिलवाड़ा ताल के ठेके और दुगुन का अभ्यास करने में मदद करेगा, साथ ही हाथ से ताल रखने की कला को भी मजबूत करेगा। प्रश्नों का उत्तर दें और अपने स्कोर की समीक्षा के लिए ‘Submit Quiz’ बटन पर क्लिक करें। आप अपनी उत्तर शीट को PDF के रूप में डाउनलोड भी कर सकते हैं।
विषय-वस्तु: ठेका गायन: तिलवाड़ा (दुगुन)
यह खंड आपको हिंदुस्तानी संगीत (मेलॉडिक इंस्ट्रूमेंट्स) के तहत तिलवाड़ा ताल और उसके दुगुन के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पहलुओं को समझने में मदद करेगा।
तिलवाड़ा ताल का परिचय
तिलवाड़ा ताल हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में प्रयोग होने वाले एक महत्वपूर्ण ताल है। यह 16 मात्राओं का ताल है और इसमें 4 विभाग होते हैं, प्रत्येक विभाग में 4 मात्राएँ होती हैं। यह ताल तीन ताल (त्रिताल) के समान ही ताली और खाली पैटर्न का अनुसरण करता है, लेकिन इसके बोल अलग होते हैं।
- मात्राएँ: 16
- विभाग: 4 (प्रत्येक 4 मात्रा का)
- तालियाँ: पहली (सम, ‘X’ चिन्ह), पाँचवीं (‘2’ चिन्ह), तेरहवीं (‘3’ चिन्ह) मात्रा पर।
- खाली: नौवीं (‘0’ चिन्ह) मात्रा पर।
ठेका (Theka)
ठेका किसी भी ताल के मूल बोलों का समूह होता है जो उस ताल की पहचान बनाता है। तिलवाड़ा ताल का ठेका इस प्रकार है:
धा धिन धिन धा | धा धा धिन धिन | धा तिं तिं ता | ता धा धिन धिन
चिन्हों के साथ:
X 2 0 3 धा धिन धिन धा | धा धा धिन धिन | धा तिं तिं ता | ता धा धिन धिन
दुगुन (Dugun)
दुगुन का अर्थ है “दुगुनी गति”। जब ताल के बोलों को मूल गति से दोगुना करके गाया या बजाया जाता है, तो उसे दुगुन कहते हैं। दुगुन का अभ्यास ताल पर नियंत्रण और लयबद्धता को मजबूत करता है। दुगुन में, एक मात्रा के अंदर दो बोलों का उच्चारण किया जाता है।
तिलवाड़ा ताल का दुगुन:
धा धिन धिन धा धा धा धिन धिन | धा तिं तिं ता ता धा धिन धिन
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि दुगुन में प्रत्येक मात्रा के अंदर दो बोल समायोजित होते हैं, लेकिन ताल चक्र और ताली-खाली का स्थान वही रहता है।
हाथ से ताल रखना (Keeping Tala with Handbeats)
संगीत में ताल को हाथ से प्रदर्शित करना एक मौलिक अभ्यास है। यह संगीतकार को ताल को आंतरिक रूप से महसूस करने और उसे सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करता है।
- ताली (Taali): जिस मात्रा पर ताली होती है, उस पर हाथ से ज़ोरदार ध्वनि (थपकी) की जाती है। तिलवाड़ा में 1, 5, 13 पर ताली।
- खाली (Khaali): जिस मात्रा पर खाली होती है, उस पर हथेली को ऊपर की ओर घुमाकर या बगल में रखकर खालीपन दर्शाया जाता है, कोई ध्वनि नहीं की जाती। तिलवाड़ा में 9 पर खाली।
- विभाग बदलना: प्रत्येक विभाग के शुरू होने पर उंगलियों से गिनना या हाथ को घुमाना।
तिलवाड़ा ताल: ठेका, दुगुन और चिन्ह तालिका
| मात्रा | बोल (ठेका) | बोल (दुगुन) | चिन्ह |
|---|---|---|---|
| 1 | धा | धा धिन | X |
| 2 | धिन | धिन धा | |
| 3 | धिन | धा धा | |
| 4 | धा | धिन धिन | |
| 5 | धा | धा तिं | 2 |
| 6 | धा | तिं ता | |
| 7 | धिन | ता धा | |
| 8 | धिन | धिन धिन | |
| 9 | धा | धा तिं | 0 |
| 10 | तिं | तिं ता | |
| 11 | तिं | ता धा | |
| 12 | ता | धिन धिन | |
| 13 | ता | ता धा | 3 |
| 14 | धा | धिन धिन | |
| 15 | धिन | धा धा | |
| 16 | धिन | धिन धिन |
नोट: दुगुन में एक मात्रा में दो बोल एक साथ बोले जाते हैं, तालिका में इन्हें सुविधा के लिए अलग-अलग दिखाया गया है।
त्वरित पुनरावृति
- तिलवाड़ा ताल में 16 मात्राएँ होती हैं, जो 4-4-4-4 के विभागों में बँटी होती हैं।
- इस ताल में ‘X’, ‘2’, ‘0’, ‘3’ के चिन्हों का प्रयोग होता है, जहाँ ‘X’ सम (पहली ताली), ‘2’ दूसरी ताली, ‘0’ खाली और ‘3’ तीसरी ताली को दर्शाता है।
- दुगुन का अर्थ है ताल को दुगुनी गति में प्रस्तुत करना, जिससे प्रत्येक मात्रा में दो बोल आते हैं।
- हाथ से ताल रखना ताली और खाली के माध्यम से ताल की सही गणना और अनुभव करने का एक व्यावहारिक तरीका है।
अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न
- तिलवाड़ा ताल के ठेके में “धा धा धिन धिन” विभाग कौन सी मात्रा से शुरू होता है?
- तिलवाड़ा ताल में खाली का चिन्ह किस मात्रा पर आता है?
- दुगुन में ताल की गति मूल गति से कितने गुना हो जाती है?
- तिलवाड़ा ताल का सम किस मात्रा पर होता है?
- हाथ से ताल रखते समय खाली का प्रदर्शन कैसे किया जाता है?
इन प्रश्नों का अभ्यास करके आप तिलवाड़ा ताल, दुगुन और हाथ से ताल रखने की अवधारणाओं को और मजबूत कर सकते हैं।

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