सदारंग MCQs क्विज | क्लास 10
कक्षा: X | विषय: हिन्दुस्तानी संगीत गायन (कोड 034) | इकाई: इकाई 5 | विषय: सदारंग MCQs क्विज | सदारंग के जीवन और योगदान पर आधारित प्रश्नों का अभ्यास करें। अपने उत्तर सबमिट करने के बाद, आप अपने स्कोर की जांच कर सकते हैं और सही उत्तरों के साथ एक विस्तृत PDF डाउनलोड कर सकते हैं।
सदारंग: हिन्दुस्तानी संगीत में एक अमूल्य योगदान
सदारंग (वास्तविक नाम: नियमत खान) 18वीं शताब्दी के एक महान संगीतकार थे, जिन्होंने हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत, विशेषकर ख्याल गायन शैली के विकास और लोकप्रियता में अद्वितीय भूमिका निभाई। उन्हें अक्सर ख्याल के ‘पितामह’ के रूप में जाना जाता है, क्योंकि उन्होंने इस शैली को दरबारी संगीत से निकालकर आम जनता तक पहुंचाया और इसे एक विशिष्ट पहचान दिलाई।
सदारंग का जीवन:
- जन्म और प्रारंभिक जीवन: सदारंग का जन्म 18वीं शताब्दी की शुरुआत में दिल्ली में एक संगीतज्ञ परिवार में हुआ था। उनके दादा, सुजान खान, मुगल सम्राट औरंगजेब के दरबारी संगीतकार थे।
- गुरु: उन्होंने अपने चाचा और ससुर, अल्लाबंदे खान से ध्रुपद की शिक्षा प्राप्त की।
- दरबारी संगीतकार: वे मुगल सम्राट मुहम्मद शाह ‘रंगीले’ (शासनकाल 1719-1748) के दरबारी संगीतकार थे, जिन्होंने कला और संस्कृति को बहुत प्रोत्साहन दिया। सदारंग ने अपने उपनाम ‘सदारंग’ का प्रयोग अपनी हजारों बंदिशों में किया। उनके पुत्र फिरोज खान ने ‘अदारंग’ उपनाम से रचनाएँ कीं।
सदारंग का योगदान:
सदारंग का सबसे महत्वपूर्ण योगदान ख्याल गायन शैली को परिष्कृत करना और उसे लोकप्रिय बनाना था।
- ख्याल का मानकीकरण:
- उन्होंने ध्रुपद की जटिलता को कम करते हुए, ख्याल को अधिक आकर्षक और सुलभ बनाया।
- उन्होंने ख्याल की संरचना में सुधार किया, जिसमें स्थायी, अंतरा, संचारी और आभोग जैसे खंड शामिल थे, जिससे गायन को एक व्यवस्थित रूप मिला।
- उन्होंने छोटे बोलों और अधिक अलंकरणों (जैसे सरगम, तानें) का प्रयोग किया, जो ख्याल की पहचान बन गए।
- बंदिशों की रचना:
- सदारंग ने हजारों ख्याल बंदिशों की रचना की, जो आज भी हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के छात्रों और कलाकारों द्वारा सीखी और प्रस्तुत की जाती हैं।
- उनकी बंदिशें विभिन्न रागों में फैली हुई हैं और राग के शुद्ध स्वरूप को दर्शाती हैं।
- उन्होंने बंदिशों में साहित्यिक सौंदर्य और गेयता का अद्भुत संतुलन स्थापित किया।
- ध्रुपद से ख्याल की ओर बदलाव:
- उनके समय तक, ध्रुपद हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की प्रमुख शैली थी। सदारंग ने ध्रुपद के गंभीर और औपचारिक स्वरूप को बनाए रखते हुए, ख्याल में अधिक लचीलापन और कल्पनाशीलता लाई।
- उन्होंने ख्याल के साथ तबले के प्रयोग को प्रोत्साहित किया, जबकि ध्रुपद में पखावज का प्रयोग होता था।
- विरासत:
- सदारंग और अदारंग की बंदिशें आज भी दिल्ली घराने और अन्य घरानों में एक मजबूत आधार प्रदान करती हैं।
- उनके योगदान ने हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत को एक नई दिशा दी और ख्याल को भारतीय संगीत का एक प्रमुख स्तंभ बना दिया।
प्रमुख बंदिशें और राग:
| राग | बंदिश का आरंभिक बोल |
|---|---|
| यमन | ‘ऐसो सुघर सुंदर बालम’ |
| भैरव | ‘मोरे मन में राम विराजे’ |
| भूपाली | ‘तेरो रूप अनुपम श्याम’ |
| बागेश्री | ‘सखी मन लागो’ |
| दरबारी कानड़ा | ‘बालमा मोरी’ |
त्वरित पुनरावृत्ति:
- वास्तविक नाम: नियमत खान
- उपनाम: सदारंग
- सम्राट: मुहम्मद शाह ‘रंगीले’
- मुख्य योगदान: ख्याल गायन शैली का विकास और लोकप्रियता
- घराना: दिल्ली घराना
- पुत्र: फिरोज खान (अदारंग)
- महत्व: ख्याल के हजारों बंदिशों की रचना
अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न:
- सदारंग ने अपनी बंदिशों में किस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया?
- संस्कृत
- ब्रजभाषा
- फ़ारसी
- उर्दू
- सदारंग के गुरु कौन थे?
- तानसेन
- मानसिंह तोमर
- अल्लाबंदे खान
- बैजू बावरा
- मुहम्मद शाह ‘रंगीले’ ने सदारंग को कौन सा वाद्य यंत्र उपहार में दिया था?
- सितार
- सारंगी
- वीणा
- रबाब
- सदारंग और अदारंग की बंदिशों को किस नाम से जाना जाता है?
- ध्रुपद बंदिशें
- बड़ा ख्याल और छोटा ख्याल
- ठुमरी बंदिशें
- तराना बंदिशें
- सदारंग ने ख्याल में किस ताल का प्रयोग अधिक किया?
- तीनताल
- झपताल
- एकताल
- उपयुक्त सभी
उत्तर: ब) ब्रजभाषा
उत्तर: स) अल्लाबंदे खान
उत्तर: द) रबाब
उत्तर: ब) बड़ा ख्याल और छोटा ख्याल
उत्तर: अ) तीनताल

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