तनपूरा संरचना एवं ट्यूनिंग MCQs क्विज | कक्षा 10
कक्षा: X | विषय: हिंदुस्तानी संगीत गायन (कोड 034) | इकाई: इकाई 2 | विषय: तनपूरा संरचना एवं ट्यूनिंग MCQs क्विज | मुख्य बिंदु: तनपूरा के भाग और ट्यूनिंग की विधि। इस क्विज को सबमिट करने के बाद आप अपने उत्तरों की समीक्षा कर सकते हैं और एक विस्तृत पीडीएफ डाउनलोड कर सकते हैं।
अतिरिक्त शैक्षिक सामग्री: तनपूरा संरचना और ट्यूनिंग
तानपूरा भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक महत्वपूर्ण तार वाद्य यंत्र है जो गायक या वादक को एक स्थिर ध्वनि प्रदान करता है। यह किसी भी राग की प्रस्तुति के लिए एक आधारभूत ध्वनि पृष्ठभूमि बनाता है, जिससे कलाकार को सुर में रहने में मदद मिलती है। तानपूरा की ध्वनि एक सतत ‘झंकार’ प्रदान करती है जो मधुर और शांत होती है, जिससे संगीत में गहराई आती है।
तानपूरा के मुख्य भाग (Parts of Tanpura)
एक तानपूरा कई भागों से मिलकर बनता है, जिनमें से प्रत्येक ध्वनि उत्पादन और गुणवत्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- तुंबा (Tumba): यह तानपूरा का सबसे निचला और बड़ा गोलाकार भाग होता है, जो आमतौर पर कद्दू या लकड़ी से बना होता है। यह ध्वनि को प्रतिध्वनित करने वाला कक्ष है।
- डांडी (Dandi): यह लंबा, खोखला डंडा होता है जो तुंबा से जुड़ा होता है। तारें इस पर से होकर गुजरती हैं। इसे तानपूरा की गर्दन कहा जा सकता है।
- घोड़ी (Bridge): यह तुंबा के ऊपर स्थित एक अर्धचंद्राकार लकड़ी का टुकड़ा होता है जिसके ऊपर से तारें गुजरती हैं। यह तारों के कंपन को तुंबा तक पहुंचाता है।
- गुल्लु (Gullu) / खूंटियाँ (Pegs): ये डांडी के ऊपरी सिरे पर लगे होते हैं और तारों को कसने या ढीला करने के लिए उपयोग किए जाते हैं, जिससे ट्यूनिंग की जाती है।
- मनका (Manka) / मोती (Beads): ये छोटे मोती या बीड्स होते हैं जो तारों के नीचे गुल्लु के पास लगे होते हैं। इनका उपयोग सूक्ष्म ट्यूनिंग के लिए किया जाता है। मनके को ऊपर-नीचे खिसका कर तार के खिंचाव को थोड़ा बदला जा सकता है।
- अटारी (Attari): यह घोड़ी और तुंबे के बीच स्थित एक छोटा लकड़ी का टुकड़ा होता है, जो घोड़ी के ठीक नीचे होता है और तारों को हल्का सा ऊपर उठाकर झंकार की गुणवत्ता में सुधार करता है।
- तारें (Strings): तानपूरा में आमतौर पर चार तारें होती हैं, हालांकि कुछ में पाँच या छह भी हो सकती हैं। मुख्य चार तारें ये हैं:
- खरज (Kharaj): यह सबसे मोटी और सबसे निचली तार होती है, जिसे मंद्र सप्तक के ‘सा’ (अक्सर C या C#) पर ट्यून किया जाता है।
- जोड़ी की तारें (Jodi Tar): ये दो तारें होती हैं, जिन्हें मध्य सप्तक के ‘सा’ (अक्सर C या C#) पर ट्यून किया जाता है।
- पंचम की तार (Pancham Tar): यह तार आमतौर पर मध्य सप्तक के ‘प’ (परफेक्ट फिफ्थ) पर ट्यून की जाती है। यदि किसी राग में पंचम वर्जित हो, तो इसे ‘म’ (शुद्ध मध्यम) या ‘ध’ (शुद्ध धैवत) पर भी ट्यून किया जा सकता है।
तानपूरा की ट्यूनिंग विधि (Tuning Method of Tanpura)
तानपूरा की सटीक ट्यूनिंग अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह गायक या वादक के लिए स्थायी आधार प्रदान करती है। ट्यूनिंग का सामान्य क्रम ‘सा-प-सा-सा’ होता है।
- खरज (Kharaj) ट्यूनिंग: सबसे पहले, सबसे मोटी तार (खरज) को मंद्र सप्तक के ‘सा’ पर ट्यून किया जाता है। यह अक्सर गायन के मुख्य आधार स्वर के रूप में काम करता है।
- पंचम (Pancham) ट्यूनिंग: इसके बाद, ‘पंचम’ की तार को मध्य सप्तक के ‘प’ पर ट्यून किया जाता है। यदि राग में ‘प’ वर्जित हो, तो इसे ‘म’ या ‘ध’ पर ट्यून किया जा सकता है।
- जोड़ी की तारें (Jodi Tar) ट्यूनिंग: अंत में, दोनों ‘जोड़ी की तारों’ को मध्य सप्तक के ‘सा’ पर ट्यून किया जाता है। इन दोनों तारों का एक साथ बजना ‘सा’ स्वर को स्थिरता प्रदान करता है।
- सूक्ष्म समायोजन (Fine Tuning): खूंटियों का उपयोग मोटे समायोजन के लिए होता है, जबकि मनकों को खिसका कर तारों को सूक्ष्म रूप से ट्यून किया जाता है ताकि पूर्ण सामंजस्य प्राप्त हो सके।
- झंकार (Jhankaaar): ट्यूनिंग करते समय, यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि प्रत्येक तार से निकलने वाली झंकार स्पष्ट और लंबी हो। अटारी की स्थिति का भी इसमें योगदान होता है।
सारांश तालिका: तानपूरा के भाग और कार्य
| भाग (Part) | मुख्य कार्य (Main Function) |
|---|---|
| तुंबा (Tumba) | ध्वनि का प्रतिध्वनि कक्ष (Resonating chamber) |
| डांडी (Dandi) | वाद्य यंत्र की गर्दन (Neck) |
| घोड़ी (Bridge) | तारों को सहारा देना और कंपन को तुंबा तक पहुंचाना |
| गुल्लु (Gullu) | तारों को कसने/ढीला करने के लिए (Pegs for tightening/loosening strings) |
| मनका (Manka) | सूक्ष्म ट्यूनिंग के लिए (For fine-tuning) |
| अटारी (Attari) | झंकार की गुणवत्ता में सुधार (Improves jhankaaar quality) |
| तारें (Strings) | ध्वनि उत्पन्न करना (Produce sound) |
त्वरित पुनरीक्षण (Quick Revision)
- तानपूरा भारतीय शास्त्रीय संगीत का आधारभूत वाद्य यंत्र है।
- इसके मुख्य भाग हैं: तुंबा, डांडी, घोड़ी, गुल्लु, मनका, अटारी, और तारें।
- चार तारों में खरज (सा), पंचम (प/म/ध), और दो जोड़ी की तारें (सा) होती हैं।
- ट्यूनिंग ‘सा-प-सा-सा’ क्रम में होती है, जिसमें खूंटियाँ और मनके का उपयोग होता है।
- सटीक ट्यूनिंग एक स्थिर और मधुर ध्वनि पृष्ठभूमि प्रदान करती है।
अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)
- तानपूरा की ध्वनि को शास्त्रीय संगीत में क्या कहा जाता है?
- तानपूरा किस परिवार का वाद्य यंत्र है (उदाहरण के लिए, तार वाद्य, वायु वाद्य)?
- आमतौर पर तानपूरा में ‘पंचम’ स्वर की तार किस नंबर पर होती है (जैसे पहली, दूसरी)?
- तानपूरा के तुंबे का मुख्य कार्य क्या है?
- तानपूरा में तारों को ऊपर उठाने और झंकार की गुणवत्ता बढ़ाने वाला छोटा टुकड़ा क्या कहलाता है?

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