Term: Tarana MCQs Quiz | Class 10
यह क्विज़ कक्षा X के ‘हिंदुस्तानी संगीत गायन (कोड 034)’ विषय की यूनिट 1 के ‘तराना’ विषय पर आधारित है, जिसमें ‘परिभाषा’ और ‘शब्दांश रचना’ जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं। अपने उत्तर सबमिट करें और एक विस्तृत पीडीएफ उत्तर पुस्तिका डाउनलोड करें।
तराना: एक विस्तृत अध्ययन
तराना हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की एक विशिष्ट और आकर्षक गायन शैली है, जो अपनी लयबद्ध जटिलता और अद्वितीय शब्दांश रचना के लिए जानी जाती है। यह मुख्य रूप से ख्याल गायन शैली का एक हिस्सा है और इसमें ऐसे अर्थहीन ध्वन्यात्मक शब्दांशों का प्रयोग होता है, जो लय और ताल की सुंदरता को दर्शाते हैं।
परिभाषा (Definition)
तराना, एक प्रकार की ऐसी संगीत रचना है जिसमें संगीतकार कुछ अर्थहीन ध्वन्यात्मक शब्दांशों (जैसे ‘नोम’, ‘तोम’, ‘दिर’, ‘तदारे’, ‘तादानी’, ‘यालाली’, ‘दीम’, ‘ताना’) का प्रयोग करते हुए राग के स्वरूप को द्रुत गति में प्रस्तुत करता है। इन शब्दांशों का कोई शाब्दिक अर्थ नहीं होता, बल्कि ये तबले या पखावज जैसे ताल वाद्यों के बोलों से प्रेरित होते हैं और लय तथा गति पर गायकों की महारत को प्रदर्शित करते हैं। तराना को कव्वाली परंपरा से विकसित माना जाता है और अमीर खुसरो को इसका जनक कहा जाता है।
शब्दांश रचना (Syllabic Composition)
तराना की सबसे विशिष्ट विशेषता इसके शब्दांशों की रचना है। इन शब्दांशों को ‘बोल’ भी कहा जाता है।
- अर्थहीनता: तराना के शब्दांशों का कोई भाषाई या शाब्दिक अर्थ नहीं होता। ये ध्वन्यात्मक इकाइयाँ होती हैं जो ध्वनि और लय पर केंद्रित होती हैं।
- वाद्यों से प्रेरणा: इन शब्दांशों में से कई तबले, पखावज या मृदंग जैसे ताल वाद्यों के बोलों (जैसे ‘दिर दिर’, ‘तूम तूम’, ‘ता’, ‘किट’, ‘तक’, ‘धा’) से लिए गए हैं। ये गायन में वाद्यों की लयबद्धता को प्रतिबिंबित करते हैं।
- गति और लय: इन शब्दांशों को अक्सर द्रुत गति में गाया जाता है, जिससे रचना में ऊर्जा और उत्साह आता है। गायक विभिन्न लयकारियों और बोलों का उपयोग करके तराना को अधिक जटिल और आकर्षक बनाते हैं।
- उदाहरण: सामान्य तराना शब्दांशों में ‘दिर दिर तदारे दानी’, ‘तादानी तूम तानोम’, ‘यालाली यालाम’ आदि शामिल हैं।
तराना का महत्व
तराना केवल एक गायन शैली नहीं है, बल्कि यह गायकों की लय और ताल पर नियंत्रण, उनकी स्वरों की कुशलता और तीव्र गति से राग प्रस्तुत करने की क्षमता का एक अद्भुत प्रदर्शन है। यह श्रोताओं को एक आनंदमय और ऊर्जावान अनुभव प्रदान करता है, जहां वे शब्दों के अर्थ के बजाय शुद्ध ध्वनि और लय का आनंद लेते हैं।
त्वरित पुनरीक्षण (Quick Revision)
- तराना: अर्थहीन ध्वन्यात्मक शब्दांशों का प्रयोग करके द्रुत गति में राग प्रदर्शन।
- जनक: अमीर खुसरो।
- प्रेरणा: कव्वाली परंपरा और ताल वाद्यों के बोल।
- मुख्य विशेषता: अर्थहीन शब्दांशों (बोल) की लयबद्ध रचना।
- उद्देश्य: गायक की लय और ताल पर महारत का प्रदर्शन।
- गायन शैली: मुख्य रूप से ख्याल गायन में प्रस्तुत।
अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न (5 Extra Practice Questions)
- तराना की उत्पत्ति किस देश में मानी जाती है?
- ख्याल गायन में तराना की क्या भूमिका है?
- ताराना में प्रयोग होने वाले कुछ अन्य प्रसिद्ध शब्दांशों के नाम बताएँ।
- गायन के दौरान तराना में किस प्रकार के भावों को व्यक्त किया जाता है?
- राग के किस खंड में तराना का प्रयोग अधिक किया जाता है?

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