संवाद लेखन – Criteria MCQs Quiz | Class 9
यह क्विज़ कक्षा IX-X के छात्रों के लिए है, जिसका विषय हिंदी मातृभाषा (Course A) (कोड 002) है और यह रचनात्मक लेखन प्रारूप इकाई के अंतर्गत आता है। इस क्विज़ में संवाद लेखन के मानदंड – सीमा में उद्देश्यपूर्ण संवाद, पात्रानुकूल भाषा, कोष्ठक में हाव-भाव संकेत, तथा विषय/मुद्दे पर अंत तक पूर्णता – से संबंधित बहुविकल्पीय प्रश्न शामिल हैं। क्विज़ पूरा करने के बाद अपने उत्तरों की समीक्षा करें और परिणामों का PDF डाउनलोड करें।
संवाद लेखन: मुख्य अवधारणाएँ और मानदंड
संवाद लेखन रचनात्मक लेखन का एक महत्वपूर्ण अंग है, जिसमें दो या दो से अधिक पात्रों के बीच बातचीत को लिखा जाता है। एक प्रभावी संवाद न केवल कहानी को आगे बढ़ाता है, बल्कि पात्रों के व्यक्तित्व, मनोदशा और स्थिति को भी उजागर करता है। CBSE पाठ्यक्रम में संवाद लेखन के कुछ निश्चित मानदंड हैं जिनका पालन करना आवश्यक है।
संवाद लेखन के महत्वपूर्ण मानदंड:
1. सीमा में उद्देश्यपूर्ण संवाद (Purposeful Dialogue within Limits)
संवाद संक्षिप्त, स्पष्ट और उद्देश्यपूर्ण होना चाहिए। अनावश्यक विस्तार से बचें और केवल वही लिखें जो विषय के लिए प्रासंगिक हो। हर संवाद का कोई न कोई लक्ष्य होना चाहिए, चाहे वह सूचना देना हो, किसी समस्या का समाधान करना हो, या पात्रों के बीच संबंध स्थापित करना हो। संवाद को सीधे मुद्दे पर आना चाहिए और उसे आगे बढ़ाना चाहिए।
2. पात्रानुकूल भाषा (Character-Appropriate Language)
संवाद की भाषा पात्रों की आयु, लिंग, शिक्षा, सामाजिक स्थिति, व्यवसाय और भावनात्मक स्थिति के अनुरूप होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, एक ग्रामीण किसान की भाषा शहरी व्यवसायी से भिन्न होगी, और एक बच्चे की भाषा एक वृद्ध व्यक्ति से अलग होगी। भाषा के उचित प्रयोग से पात्र जीवंत और विश्वसनीय लगते हैं।
3. कोष्ठक में हाव-भाव संकेत (Gestures and Expressions in Brackets)
संवाद को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए पात्रों के हाव-भाव, क्रियाएँ, शारीरिक मुद्राएँ और बोलने के तरीके को कोष्ठक में दर्शाया जाना चाहिए। ये संकेत पात्रों की भावनाओं को व्यक्त करते हैं और पाठक को स्थिति को बेहतर ढंग से समझने में मदद करते हैं। जैसे: (हंसते हुए), (गुस्से में), (सोचते हुए), (धीरे से), (आश्चर्य से)।
4. विषय/मुद्दे पर अंत तक पूर्णता (Completeness on the Topic/Issue till the End)
संवाद अपने निर्धारित विषय या मुद्दे पर केंद्रित रहना चाहिए और अंत तक उस पर पूर्णता प्रदान करनी चाहिए। संवाद का एक उचित आरंभ, मध्य और अंत होना चाहिए। इसका अर्थ है कि संवाद किसी निष्कर्ष पर पहुँचे या कम से कम उस मुद्दे को स्पष्ट रूप से संबोधित करे जिसके लिए संवाद शुरू किया गया था। अधूरा या भटका हुआ संवाद प्रभावी नहीं माना जाता।
त्वरित पुनरीक्षण
- संवाद में अनावश्यक बातें न हों, केवल मुख्य विषय पर केंद्रित हो।
- पात्रों की उम्र, स्थिति और स्वभाव के अनुसार भाषा का प्रयोग करें।
- पात्रों की भावनाओं और क्रियाओं को कोष्ठक में दर्शाएँ।
- संवाद का एक स्पष्ट निष्कर्ष या समापन होना चाहिए।
- संवाद स्वाभाविक और प्रवाहपूर्ण होना चाहिए।
अभ्यास प्रश्न
- अपने मित्र के साथ बोर्ड परीक्षा की तैयारी के बारे में संवाद लिखिए, जिसमें आप दोनों एक-दूसरे को प्रेरित कर रहे हों।
- दुकानदार और ग्राहक के बीच सब्जियों के दाम को लेकर हुए संवाद को लिखिए।
- दो दोस्तों के बीच ऑनलाइन पढ़ाई के फायदे और नुकसान पर संवाद लिखिए।
- एक छोटे बच्चे और उसकी माँ के बीच स्कूल के पहले दिन के अनुभव पर संवाद लिखिए।
- प्रधानाचार्य और एक छात्र के बीच विद्यालय में अनुशासन बनाए रखने के महत्व पर संवाद लिखिए।

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